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मकर संक्रांतिः सृष्टि में ऊर्जा का नवसंचार करने वाला पर्व

मकर संक्रांतिः सृष्टि में ऊर्जा का नवसंचार करने वाला पर्व

लेख
मृत्युंजय दीक्षित मकर संक्रांति के मौके पर जब सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सृष्टि में ऊर्जा का नवसंचार करने का पर्व माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन जप, तप, दान, स्नान, श्रद्धा, तर्पण आदि विधियों का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन दिया गया दान सौ गुना बढ़कर मिलता है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि का दान किया जाता है, और गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। इस पर्व से संबंधित पौराणिक कथाएं भी हैं, जैसे भगवान भास्कर का अपने पुत्र शनिदेव से मिलने जाना और महाभारत के समय भीष्म पितामह का इसी दिन देह त्याग करना। इस दिन गंगाजी ने भगीरथ के साथ कपिल मुनि के आश्रम से सागर में जाकर मिलने का कार्य किया था। इसके अलावा, भगवान विष्णु ने इस दिन असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी, इसलिए इसे सकारात्मक...
मकर संक्रांति त्योहार के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत

मकर संक्रांति त्योहार के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत

लेख
-पंकज जगन्नाथ जयस्वाल। हर साल 14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति के त्योहार का महत्व भारतीय सौर कैलेंडर के अनुसार है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति में खगोलीय घटनाओं और कृषि चक्रों से जुड़ा हुआ है। मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का संकेत देती है, जो सर्दियों के अंत और फसलों की कटाई की शुरुआत का प्रतीक है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन को विभिन्न नामों से मनाया जाता है, जैसे कि उत्तरी भारत में लोहड़ी, असम में भोगली बिहू, और दक्षिण भारत में पोंगल। इस दिन तिल और गुड़ से बने लड्डू का विशेष महत्व है, जो सर्दियों के मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी इस उत्सव को सामाजिक समरसता और छुआछूत के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाता है, और आधुनिक परिवेश में पर्यावरण की रक्षा के लिए बायोडिग्रेडेबल पतंग उड़ाने जैसी प्रथाओं को अपनाता है। मकर संक्रांति न...
आकाश में शनिवार को एक सीध में होंगे पृथ्वी, बृहस्पति और सूर्य

आकाश में शनिवार को एक सीध में होंगे पृथ्वी, बृहस्पति और सूर्य

राष्ट्रीय
भोपाल, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। लेखक: LN Star News खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए शनिवार, 10 जनवरी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दिन एक विशेष खगोलीय घटना घटित होगी, जिसमें परिक्रमा करते हुए सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (जुपिटर), हमारा ग्रह पृथ्वी और सूर्य तीनों एक सरल रेखा में आ जाएंगे। इस निकटता के कारण बृहस्पति सर्वाधिक चमक के साथ अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देगा। मध्य प्रदेश की नेशनल अवार्ड से सम्मानित विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने शुक्रवार को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शनिवार दोपहर 2 बजकर 4 मिनट पर जुपिटर, पृथ्वी और सूर्य एक सीध में होंगे। इस दौरान जुपिटर की पृथ्वी से दूरी लगभग 63 करोड़ 30 लाख 76 हजार किलोमीटर (जो कि सबसे कम होगी) रह जाएगी। इस कम दूरी के कारण, 'गुरुदर्शन' का यह सर्वोत्तम अवसर होगा, जिससे जुपिटर सबसे अधिक चमकील...