

भोपाल, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)।
लेखक: LN Star News
खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए शनिवार, 10 जनवरी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दिन एक विशेष खगोलीय घटना घटित होगी, जिसमें परिक्रमा करते हुए सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (जुपिटर), हमारा ग्रह पृथ्वी और सूर्य तीनों एक सरल रेखा में आ जाएंगे। इस निकटता के कारण बृहस्पति सर्वाधिक चमक के साथ अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देगा।
मध्य प्रदेश की नेशनल अवार्ड से सम्मानित विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने शुक्रवार को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शनिवार दोपहर 2 बजकर 4 मिनट पर जुपिटर, पृथ्वी और सूर्य एक सीध में होंगे। इस दौरान जुपिटर की पृथ्वी से दूरी लगभग 63 करोड़ 30 लाख 76 हजार किलोमीटर (जो कि सबसे कम होगी) रह जाएगी। इस कम दूरी के कारण, ‘गुरुदर्शन’ का यह सर्वोत्तम अवसर होगा, जिससे जुपिटर सबसे अधिक चमकीला और अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देगा।
सारिका घारू ने आगे बताया कि बिना किसी टेलीस्कोप के भी जुपिटर को शाम को पूर्व दिशा में चमकते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, यदि आप टेलीस्कोप का उपयोग करते हैं, तो इसकी डिस्क की पट्टिकाओं और इसके चार गैलिलियन चंद्रमाओं को भी देख पाएंगे। इस खगोलीय घटना के समय जुपिटर माइनस 2.68 के मैग्नीट्यूड से चमक रहा होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि बृहस्पति, जिसे गुरु के नाम से भी जाना जाता है, इस समय आकाश में मिथुन तारामंडल में स्थित है। यह शाम को उदय होकर पूरी रात आकाश में रहेगा, मध्यरात्रि में सिर के ठीक ऊपर होगा और सुबह पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएगा। खगोल प्रेमियों के लिए शनिवार को यह एक सुनहरा अवसर है, जब पृथ्वी और बृहस्पति एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे। अतः, इस ‘गुरुदर्शन’ के अवसर को चूकना नहीं चाहिए।
सारिका घारू ने यह भी जानकारी दी कि बृहस्पति हमारे ग्रह पृथ्वी से लगभग 11 गुना अधिक चौड़ा है। यदि हमारी पृथ्वी को अंगूर के आकार का माना जाए, तो जुपिटर का आकार बास्केटबॉल जैसा होगा। जुपिटर की सूर्य से इतनी अधिक दूरी है कि सूर्य का प्रकाश उस तक पहुँचने में लगभग 43 मिनट का समय लेता है। अब तक जुपिटर के 95 चंद्रमा खोजे जा चुके हैं।
