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धर्म ही है सृष्टि का संचालक और भारत के पुनरुत्थान का आधार

धर्म ही है सृष्टि का संचालक और भारत के पुनरुत्थान का आधार

लेख
By: डॉ. मयंक चतुर्वेदी डॉ. मोहन भागवत ने ‘धर्म’ को सृष्टि का संचालक बताया है। उनका कथन है, सृष्टि निर्माण के साथ उसके संचालन के लिए बने नियम ही धर्म हैं। ये नियम विश्वव्यापी हैं। कोई व्यक्ति या वस्तु पूर्णतः अधर्मी नहीं हो सकते। यह प्राचीन ग्रंथों की गहन व्याख्या पर आधारित उनका धर्म के विषय में निष्कर्ष है। श्रीमद्भागवत, मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, महाभारत जैसे ग्रंथ ‘धर्म’ को स्वाभाविक नियम के रूप में परिभाषित करते हैं। डॉ. भागवत जी का मूल सूत्र यही है कि ‘धर्म’ ही पूरी सृष्टि का ड्राइवर है। यही श्रीमद्भागवत पुराण में कहा गया है “धर्मः सनातनः सर्वस्य मूलं” अर्थात् धर्म सनातन है और समस्त सृष्टि का मूल। भगवान विष्णु स्वरूप में सृष्टि संचालित करते हैं। नियम ‘धर्म’ के रूप में निर्धारित हैं। यहां डॉ. भागवत जल को बहने और अग्नि को जलाने का ‘धर्म’ बताते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसा श्रीमद्भागवत पु...
हिन्दू समाज में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए: नरेन्द्र ठाकुर

हिन्दू समाज में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए: नरेन्द्र ठाकुर

राष्ट्रीय
लखनऊ, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि हिन्दू समाज में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। संघ भेदभाव नहीं मानता, लेकिन समाज में भेदभाव मौजूद है। हमें जातिगत भेदभाव, छुआछूत, भाषा व क्षेत्र के भेद से ऊपर उठकर एक साथ खड़ा होना होगा तभी हम संगठित हो सकते हैं। नरेन्द्र ठाकुर ने बुधवार को यहां वृन्दावन योजना स्थित त्रयंबकेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे धर्म ग्रन्थों में जाति के नाम पर छुआछूत का उल्लेख नहीं है। छुआछूत गुलामी के काल में आयी हुई कुरीति है। संघ के अंदर किसी प्रकार की जाति नहीं मानी जाती। उन्होंने बताया कि संघ का स्वयंसेवक जाति को नहीं मानता। ठाकुर ने आगे कहा कि संघ के दूसरे सरसंघचालक माधव राव सदाशिवराम गोलवलकर श्रीगुरूजी ने सभी संतों को एक मंच पर लाने का ...
भोपाल में संघ के शताब्दी वर्ष पर हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ, दिया गया स्वदेशी और राष्ट्रहित का संदेश

भोपाल में संघ के शताब्दी वर्ष पर हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ, दिया गया स्वदेशी और राष्ट्रहित का संदेश

मध्य प्रदेश, राज्य
भोपाल, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राजधानी भोपाल में सोमवार को हिंदू सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह सम्मेलन कैंपियन ग्राउंड के निकट आयोजित किया गया, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इस अवसर पर प्रस्तुत एक विशेष नाटक ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। नाटक के माध्यम से वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक परिदृश्यों पर गहराई से विचार प्रस्तुत किए गए। नाटक में अमेजन, उबर, पिज्जा हट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते प्रभाव को उजागर करते हुए दिखाया गया कि देश किस तरह विदेशी उत्पादों और सेवाओं पर निर्भरता की ओर बढ़ रहा है। प्रस्तुतियों के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि स्वदेशी विकल्पों की अनदेखी से भारत को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। नाटक ने अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को भी दर्शाया, जिसम...