बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी का कट्टरपंथी एजेंडा: उदारवादी मुखौटे के पीछे छिपा सत्य
ढाका, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी की तथाकथित “मध्यमार्गी” छवि और उसकी वैचारिक जड़ों के बीच गहरा विरोधाभास स्पष्ट हुआ है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, जमात का मूल सिद्धांत जनता की संप्रभुता नहीं, बल्कि ईश्वर की सर्वोच्चता पर आधारित है, और उसका अंतिम लक्ष्य ‘इकामत-ए-दीन’ यानी इस्लाम को जीवन की पूर्ण व्यवस्था के रूप में स्थापित करना है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जमात ने “दोहरी भाषा” की राजनीति में महारत हासिल कर ली है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर, पार्टी के वरिष्ठ नेता संवैधानिक मूल्यों की बात करते हैं और तुरंत शरीयत लागू न करने का वादा करते हैं, जिससे वे खुद को एक उदार और लोकतांत्रिक संगठन के रूप में प्रस्तुत कर सकें। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह भिन्न है।
ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां चुनावी समर्थन का निर्धारण होता है, जम...


