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Tag: बांग्लादेश

बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी का कट्टरपंथी एजेंडा: उदारवादी मुखौटे के पीछे छिपा सत्य

बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी का कट्टरपंथी एजेंडा: उदारवादी मुखौटे के पीछे छिपा सत्य

अंतरराष्ट्रीय
ढाका, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी की तथाकथित “मध्यमार्गी” छवि और उसकी वैचारिक जड़ों के बीच गहरा विरोधाभास स्पष्ट हुआ है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, जमात का मूल सिद्धांत जनता की संप्रभुता नहीं, बल्कि ईश्वर की सर्वोच्चता पर आधारित है, और उसका अंतिम लक्ष्य ‘इकामत-ए-दीन’ यानी इस्लाम को जीवन की पूर्ण व्यवस्था के रूप में स्थापित करना है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जमात ने “दोहरी भाषा” की राजनीति में महारत हासिल कर ली है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर, पार्टी के वरिष्ठ नेता संवैधानिक मूल्यों की बात करते हैं और तुरंत शरीयत लागू न करने का वादा करते हैं, जिससे वे खुद को एक उदार और लोकतांत्रिक संगठन के रूप में प्रस्तुत कर सकें। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह भिन्न है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां चुनावी समर्थन का निर्धारण होता है, जम...
भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ कराने वाले एजेंट की गिरफ्तारी

भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ कराने वाले एजेंट की गिरफ्तारी

अपराध
मालदा, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। भारत–बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ को रोकने के प्रयास में मालदा जिले की हबीबपुर थाना पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। एक भारतीय युवक को, जो बांग्लादेशी नागरिकों को पैसों के बदले अवैध रूप से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, की पहचान राजू मंडल उर्फ सुजीत चौधुरी (28) के रूप में की गई है। वह हबीबपुर के आगरा हरिश्चंद्रपुर इलाके का निवासी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस घुसपैठ के मामले का खुलासा 21 जनवरी को हुआ, जब एक बांग्लादेशी नागरिक को अवैध रूप से सीमा पार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उस बांग्लादेशी नागरिक ने राजू मंडल का नाम उजागर किया। जांच में यह पता चला कि राजू पैसे लेकर एक एजेंट के रूप में कार्य कर रहा था, जो लोगों को सीमा पार कराता था। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर राजू मंडल को गिरफ्तार किया। अ...

बांग्लादेश में छात्र संघ चुनाव में धांधली का आरोप, बीएनपी छात्रों का धरना

अंतरराष्ट्रीय
ढाका, 18 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की छात्र शाखा जातीयताबादी छात्र दल (जेसीडी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रविवार को ढाका के अगरगांव में चुनाव आयोग के मुख्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने आयोग पर पोस्टल बैレット और छात्र संघ चुनाव के फैसलों में भेदभाव का आरोप लगाया। यह लोग सुबह लगभग 10 बजे आयोग के मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए और प्रदर्शन किया।   द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार हजारों छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया। इस दौरान जेसीडी अध्यक्ष रकीबुल इस्लाम ने भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आयोग के अधिकारियों की शह पर एक राजनीतिक पार्टी ने बैलेट पेपर के साथ छेड़छाड़ की। छात्र संघ चुनाव में भी ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के आगामी केंद्रीय छात्र संघ चुनाव में भी धांधली हो सकती है। उन्होंने आर...
19 जनवरी का इतिहास: इंदिरा गांधी बनीं भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री

19 जनवरी का इतिहास: इंदिरा गांधी बनीं भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री

राष्ट्रीय
[City], 18 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। भारतीय राजनीतिक इतिहास में 19 जनवरी का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन वर्ष 1966 में इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। यह जिम्मेदारी उन्हें ऐसे समय में सौंपी गई, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आकस्मिक निधन से देश शोक में था। कांग्रेस नेतृत्व ने शास्त्री के निधन के बाद इंदिरा गांधी पर भरोसा जताया। इसके साथ ही स्वतंत्र भारत में पहली बार ऐसा हुआ, जब किसी प्रधानमंत्री की संतान ने उसी पद को संभाला, जिस पर पहले उनके पिता और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू आसीन रहे थे। इंदिरा गांधी का कार्यकाल भारतीय राजनीति के सबसे निर्णायक दौरों में गिना जाता है। वह 1967 से 1977 तक प्रधानमंत्री रहीं और इसके बाद 1980 में दोबारा सत्ता में लौटीं। 31 अक्टूबर 1984 को उनके निधन तक उन्होंन...
बांग्लादेश में हिन्दुओं के अत्याचार पर मोदी सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए: शंकराचार्य सरस्वती

बांग्लादेश में हिन्दुओं के अत्याचार पर मोदी सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए: शंकराचार्य सरस्वती

राष्ट्रीय
प्रयागराज, 18 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ ही अन्य गैर-मुस्लिम समुदाय भी अत्याचार का शिकार हो रहे हैं। विश्व मानवाधिकार समुदाय इस पर चुप्पी साधे हुए है। ऐसी विकट स्थिति में केंद्र की मोदी सरकार को आगे आकर आवाज उठानी चाहिए। यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो सेना भेजकर सनातनियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। यह बात रविवार को 'हिन्दुस्थान समाचार' से मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेला के शंकराचार्य मार्ग स्थित शिविर में काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कही। उन्होंने आगे बताया कि बांग्लादेश में सनातनियों की जनसंख्या लगभग एक करोड़ दस लाख है। उनकी सुरक्षा के लिए पांच लाख हथियारबंद लोगों को तैयार करना आवश्यक है, तभी हिन्दुओं का अस्तित्व सुरक्षित रह पाएगा। इसके साथ ही, बांग्लादेश में मौजूद गैर मुस्लिम ईसाई, यहूदी, बौद्ध तथा अन्...
नहीं थम रहा बंगलादेश में हिन्दुओं की हत्या का दौर

नहीं थम रहा बंगलादेश में हिन्दुओं की हत्या का दौर

लेख
-रमेश शर्मा बंगलादेश, 14 जनवरी । बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमलों और उनकी बर्बर हत्याओं का दौर रुक नहीं रहा। इसमें हिन्दू स्त्रियों के साथ सामूहिक बलात्कार का अध्याय भी जुड़ गया है। लेकिन भारत के अधिकांश राजनीतिक दल चुप हैं जिन्हें आतंकवादियों के भी मानवाधिकार की चिंता रहती है। पिछले सप्ताह काँग्रेस नेता जयराम रमेश और के वेणुगोपाल तो मीडिया से बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्या का प्रश्न सुनकर ही भाग निकले। यह वही बंगलादेश है जिसके निवासियों को कभी अपनी बांग्ला संस्कृति पर गर्व होता था और बांग्ला संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष किया था। उनके संघर्ष को सार्थक करने के लिए भारत ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी थी। 1971 का युद्ध भी झेला था। इसमें भारत के लगभग 3900 जवानों का बलिदान हुआ था और लगभग 10,000 सैनिक घायल हुए थे। लाखों करोड़ का वित्तीय भार पड़ा सो अलग। बंगलादेश यदि अस्तित्व में आया है ...

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने नौकरशाही के सामने घुटने टेकेः टीआईबी

अंतरराष्ट्रीय
ढाका, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) के कार्यकारी निदेशक इफ्तेखारुज्जमां ने आज कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने असल में नौकरशाही के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस सरकार ने राज्य पुनर्गठन के नाम पर अपने अधिकतर सुधार लक्ष्यों को पूरा करने में असफलता दिखाई है। यह महत्वपूर्ण है कि यह आत्मसमर्पण क्यों हुआ और इसकी मूल कमजोरी क्या है। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, इफ्तेखारुज्जमां ने कहा कि उनके पास इसका स्पष्ट उत्तर नहीं है, क्योंकि वह सरकार की अंदरूनी निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश में औपचारिक रूप से एक सलाहकार परिषद या कैबिनेट है, लेकिन असली अधिकार उसके पास नहीं हैं। धनमंडी 27 में टीआईबी के कार्यालय में "अंतरिम सरकार के उद्देश्यों को तय करने में सुधार की उदासीनता" शीर्षक से एक लिखित सा...