
[City], 18 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। भारतीय राजनीतिक इतिहास में 19 जनवरी का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन वर्ष 1966 में इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। यह जिम्मेदारी उन्हें ऐसे समय में सौंपी गई, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आकस्मिक निधन से देश शोक में था।
कांग्रेस नेतृत्व ने शास्त्री के निधन के बाद इंदिरा गांधी पर भरोसा जताया। इसके साथ ही स्वतंत्र भारत में पहली बार ऐसा हुआ, जब किसी प्रधानमंत्री की संतान ने उसी पद को संभाला, जिस पर पहले उनके पिता और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू आसीन रहे थे।
इंदिरा गांधी का कार्यकाल भारतीय राजनीति के सबसे निर्णायक दौरों में गिना जाता है। वह 1967 से 1977 तक प्रधानमंत्री रहीं और इसके बाद 1980 में दोबारा सत्ता में लौटीं। 31 अक्टूबर 1984 को उनके निधन तक उन्होंने देश का नेतृत्व किया।
दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत नेतृत्व के लिए पहचानी जाने वाली इंदिरा गांधी ने कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए। बैंकों का राष्ट्रीयकरण, 1971 का भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश का निर्माण उनके शासनकाल की प्रमुख उपलब्धियां रहीं। वहीं 1975 में लगाए गए आपातकाल ने उन्हें आलोचनाओं के केंद्र में भी रखा।
इंदिरा गांधी भारतीय राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में याद की जाती हैं, जिन्होंने साहसिक निर्णयों से देश की दिशा को गहराई से प्रभावित किया।
