Saturday, March 7खबर जो असर करे |
Shadow

Tag: नक्सलवाद

मुख्यमंत्री ने अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन को झंडी दिखाकर रवाना किया, दौड़ में भाग लिया

मुख्यमंत्री ने अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन को झंडी दिखाकर रवाना किया, दौड़ में भाग लिया

छत्तीसगढ़, राज्य
नारायणपुर, 31 जनवरी (हिनूस)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शनिवार की सुबह नारायणपुर के हाईस्कूल परिसर के निकट आयोजित हॉफ मैराथन में भाग लिया और धावकों को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सांकेतिक रूप से दौड़ भी लगाई और विजेता प्रतिभागियों को दिए जाने वाले मैडल का अनावरण किया। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इस ऐतिहासिक दौड़ में 60 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय धावकों के साथ-साथ 10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिससे यह आयोजन विशेष बना। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ आज शांति, विश्वास और विकास के नए अध्याय की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह मैराथन केवल एक दौड़ नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित और समावेशी भविष्य की दिशा में हमारे संकल्प का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अबूझमाड़ का यह क्षेत्र, जहां कभी आम नागरिकों और जवानों का पहुंचना भी कठिन था, आज सकारात्मक वातावरण के कारण हज...
ग्राम मुकावेल्ली में नेशनल पार्क क्षेत्र में नए सुरक्षा एवं सुविधा कैम्प की स्थापना

ग्राम मुकावेल्ली में नेशनल पार्क क्षेत्र में नए सुरक्षा एवं सुविधा कैम्प की स्थापना

छत्तीसगढ़, राज्य
बीजापुर, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों के छिपने के एकमात्र आश्रय स्थल नेशनल पार्क के इलाके में नक्सलियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए डीआरजी, जिला बल, छगसबल, और सीआरपीएफ 19 वाहिनी डी बटालियन की संयुक्त टीमों द्वारा थाना फरसेगढ़ क्षेत्रांतर्गत ग्राम पंचायत सागमेट्टा के आश्रित ग्राम मुकावेल्ली में नवीन सुरक्षा एवं सुविधा कैम्प स्थापित किया गया है। घने जंगलों में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ, पहुंच विहीन रास्ते और कड़ाके की ठंड के बावजूद सुरक्षाबलों ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए यह कैम्प सफलतापूर्वक स्थापित किया है। भोपालपटनम् से फरसेगढ़, सेण्ड्रा और गढ़चिरौली को जोड़ने के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रगति है। यह उपलब्धि सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है और आगामी समय में नेशनल पार्क क्षेत्र के दूरदराज गांवों को सड़क और अन्य आधारभूत सुव...
भारत में वामपंथी वैचारिकी, विश्वविद्यालयी आंदोलन और नक्सली समर्थन

भारत में वामपंथी वैचारिकी, विश्वविद्यालयी आंदोलन और नक्सली समर्थन

लेख
शहर, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। लेखक: LN Star Newsभारत का लोकतंत्र अपनी विविधता, मतभिन्नता और खुली बहस की परंपरा के कारण विश्व में विशिष्ट रहा है। किंतु पिछले दो दशकों में एक ऐसी वैचारिक धारा विकसित हुई है, जिसने विश्वविद्यालयों, वामपंथी छात्र संगठनों, शहरी बुद्धिजीवी समूहों और माओवादी हिंसा को व्यापक वैचारिक सूत्र में पिरो दिया है। यह विमर्श केवल छात्र-राजनीति या असहमति तक सीमित नहीं; यह राज्य-विरोध, पहचान की राजनीति, ‘क्रांतिकारी प्रतिरोध’ की संस्कृति और अंततः माओवादी सशस्त्र संघर्ष तक फैला सुनियोजित नैरेटिव बन चुका है। सबसे स्पष्ट उदाहरण दिल्ली के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया तथा हैदराबाद एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय हैं, जहाँ विमर्श का झुकाव धीरे-धीरे राष्ट्रीय दृष्टिकोण से हटकर एक प्रकार के वैचारिक अराजकवाद की ओर दिखाई देता है। जेएनयू में एसएफआई, एआईएसए, डी...