
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने कहा कि अफगानिस्तान हमेशा शांति का पक्षधर रहा है, लेकिन अपने सीमाई और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क़तर और सऊदी अरब की मध्यस्थता के बाद फिलहाल संघर्ष विराम लागू है, लेकिन यदि पाकिस्तान ने शांति नहीं चाही तो अफगानिस्तान के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।
मुत्ताकी ने रविवार को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में दूसरी बार प्रेस वार्ता की और कई मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान की चार घंटे चली जवाबी कार्रवाई के दौरान केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और किसी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि 2,400 किलोमीटर लंबी ड्यूरंड रेखा को कभी कोई नियंत्रित नहीं कर सका — न चंगेज़ खान, न ब्रिटिश, न अमेरिकी, और अब पाकिस्तान भी ऐसा नहीं कर पाएगा।
टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के सवाल पर मुत्ताकी ने कहा कि अफगानिस्तान में इसकी कोई मौजूदगी नहीं है। वहां जो लोग हैं, वे पाकिस्तान के विस्थापित शरणार्थी हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अंदर जारी संघर्ष उसका आंतरिक मामला है और अफगानिस्तान को इसके लिए दोष देना अनुचित है।
महिला अधिकारों के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि तालिबान सरकार इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों के अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान शासन ने अपने विरोधियों को माफ कर देश में स्थायी शांति का मार्ग अपनाया है।
भारत यात्रा के दौरान मुत्ताकी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। बैठक में दोनों पक्षों ने व्यापार, अर्थव्यवस्था और विकास परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। भारत ने अफगानिस्तान में अपने तकनीकी मिशन को दूतावास स्तर तक उन्नत करने और अफगान राजनयिकों को दिल्ली आने की अनुमति देने की घोषणा की। साथ ही दोनों देशों के बीच एक संयुक्त व्यापार समिति गठित करने पर सहमति बनी।
अफगान विदेश मंत्री ने भारत को खनिज, कृषि, स्वास्थ्य और खेल क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। बैठक में चाबहार बंदरगाह के उपयोग, वाघा बॉर्डर को खोलने और अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने पर भी चर्चा हुई। भारत ने काबुल-दिल्ली उड़ानों की संख्या बढ़ाने और शिक्षा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में वीज़ा सुविधाओं का विस्तार करने का आश्वासन दिया।
अंत में मुत्ताकी ने कहा कि नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास अब पूरी तरह इस्लामिक अमीरात के नियंत्रण में है। झंडे से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, “हमने इसी झंडे के नीचे जिहाद लड़ा और विजय प्राप्त की, इसलिए यही हमारा राष्ट्रीय प्रतीक रहेगा।”
