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हिमाचल का असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर निशांत सरीन ईडी की गिरफ्त में, 13 फार्मा कंपनियों से करोड़ों की रिश्वत लेने का आरोप

शिमला, 12 अक्टूबर।
हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर निशांत सरीन का भ्रष्टाचार जाल ईडी की जांच में उजागर हो गया है। ईडी ने सरीन को आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि सरीन 13 फार्मा कंपनियों से होटल बुकिंग, नकद राशि, महंगे उपहार और अन्य सुविधाओं के रूप में करोड़ों रुपये के लाभ उठा रहा था।

ईडी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, निशांत सरीन ने अपने पद का दुरुपयोग कर कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से इन पैसों को वैध दिखाने की कोशिश की। उनके खिलाफ हिमाचल और हरियाणा में पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

वर्ष 2019 में हिमाचल स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने सरीन के खिलाफ रिश्वत लेने और पद का दुरुपयोग करने का मामला दर्ज किया था। इस केस में उन पर दवा निरीक्षक रहते हुए 43 लाख रुपये की अवैध वसूली के आरोप लगे थे। इसके बाद 2022 में हरियाणा पुलिस ने पंचकूला में धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में एफआईआर दर्ज की, जिसमें उनके सहयोगियों डॉ. कोमल खन्ना और विनय अग्रवाल के नाम भी शामिल हैं।

हाल ही में 23 सितंबर 2025 को शिमला में दर्ज एफआईआर में सरीन पर 1.66 करोड़ रुपये से अधिक की असमानुपातिक संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया। जांच में सामने आया कि 2019 के बाद उन्होंने कई महंगी संपत्तियां खरीदीं, जिनमें चंडीगढ़ की ओमैक्स सोसाइटी में संपत्ति भी शामिल है।

ईडी की जांच से यह भी सामने आया कि सरीन ने 13 फार्मा कंपनियों से लगभग 1.06 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। कई फार्मा प्रतिनिधियों ने ईडी को दिए बयानों में स्वीकार किया कि सरीन द्वारा उत्पीड़न के डर से उन्होंने ये लाभ दिए।

सरीन की करीबी सहयोगी डॉ. कोमल खन्ना ज़ेनिया फ़ार्मास्यूटिकल्स और निया फार्मा नामक कंपनियां चला रही थीं, जिनके असली लाभार्थी सरीन ही थे। इन कंपनियों के जरिए उन्होंने लगभग 5.78 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को वैध दिखाने का प्रयास किया।

ईडी ने जून 2025 में सरीन के ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद हुए। एजेंसी ने बताया कि सरीन की संपत्तियाँ उनकी ज्ञात आय से कई गुना अधिक हैं।

9 अक्टूबर 2025 को पूछताछ के दौरान सरीन ने जांच को गुमराह करने की कोशिश की। ईडी के अनुसार, वह गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए उसकी कस्टडी में पूछताछ जरूरी है।

एजेंसी ने बताया कि निशांत सरीन पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 3 और 4 के तहत कार्रवाई की गई है। अब ईडी उनकी अवैध संपत्तियों की पहचान, धन प्रवाह की जांच और सह-अभियुक्तों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।

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