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भारत एकमात्र देश जहां बहुसंख्यकों का हुआ नरसंहार: विवेक अग्निहोत्री

उज्जैन, 12 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में अवंतिका विश्वविद्यालय में आयोजित यंग थिंकर्स कॉन्फ्लुएंस में फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कहा कि भारत वह एकमात्र देश है जहां सदियों से बहुसंख्यक समाज पर अत्याचार और नरसंहार हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने ज्ञान और संस्कृति की शक्ति से ही इन सबका सामना करते हुए प्रगति की है।

अग्निहोत्री ने कहा कि विश्व इतिहास में आमतौर पर बहुसंख्यक समाज अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करते रहे हैं, लेकिन भारत में इसका उलटा हुआ। उन्होंने सुझाव दिया कि पिछले एक हजार वर्षों में हिंदू समाज पर हुए अत्याचारों का दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए ताकि इतिहास के वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जा सके।

कार्यक्रम के पहले सत्र में लेखक डॉ. राम शर्मा ने कहा कि भारत में परिवार और समाज का संबंध भावनात्मक और मूल्य आधारित रहा है, जबकि पश्चिमी समाजों में यह उपभोक्तावादी दृष्टिकोण से प्रभावित हो गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था पर मार्क्सवादी विचारधाराएं लगातार प्रहार कर रही हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. वेंकटेश ने कहा कि पश्चिमी समाजों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के चरम और पारिवारिक विघटन के कारण सामाजिक असंतुलन और अपराध दरों में वृद्धि हुई है। वहीं लेखक अनुराग शर्मा ने कहा कि आज बच्चों की शिक्षा और परवरिश पर वोकिज्म, माक्र्सवाद और अतिवादी नारीवाद का नकारात्मक असर हो रहा है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों में भारतीय संस्कार और नैतिकता को मजबूत करें।

अमृतांशु पांडे ने कहा कि भारत का वास्तविक इतिहास हमारी परंपराओं, ग्रंथों और सांस्कृतिक चेतना में सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि उनकी पुस्तक भारत की भूली कहानियों को उजागर करने का प्रयास करती है।

लेखक अंकुर कक्कर ने कहा कि भारत हमेशा से ज्ञान और शिक्षा की भूमि रहा है। यहां की गुरुकुल परंपरा ने सिर्फ विद्या ही नहीं, बल्कि संस्कार भी सिखाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा में भारतीय संस्कृति और अंग्रेजी भाषा के बीच संतुलन आवश्यक है।

यंग थिंकर्स कॉन्फ्लुएंस 10 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक उज्जैन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस आयोजन में देशभर से 400 चयनित युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। तीन दिवसीय इस वैचारिक आयोजन में “डीप स्टेट”, “भारत की भारतीय अवधारणा”, “परिवार व्यवस्था” और “विकसित भारत” जैसे विषयों पर मंथन हुआ। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पुस्तक मेले ने भी प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया।

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