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MP: दतिया उपचुनाव में हार के बाद भाजपा की बड़ी कार्रवाई, पूरे जिले की कार्यकारिणी भंग

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के दतिया विधानसभा उपचुनाव (Datia Assembly By-election) में मिली हार के बाद बीजेपी (BJP) ने बड़ा फैसला लिया है. पार्टी ने दतिया का पूरा जिला संगठन भंग कर दिया है. जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह (Raghuvir Singh Kushwaha) समेत पूरी जिला कार्यकारिणी को पद से हटा दिया गया है. जिले में काम कर रही सभी स्थानीय संगठनात्मक इकाइयों को भी खत्म कर दिया गया. अब यहां नई टीम बनाई जाएगी. इस फैसले को उपचुनाव में मिली हार के बाद संगठन में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।


बीजेपी की ओर से जारी आदेश में जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने की बात कही गई है. इसके साथ ही पूरी जिला कार्यकारिणी को भी भंग कर दिया गया. इतना ही नहीं, पार्टी ने मंडल, मोर्चा, विभाग और दूसरी सभी स्थानीय इकाइयों को भी खत्म कर दिया है. यानी दतिया में अब संगठन पूरी तरह नए सिरे से तैयार होगा।


हालांकि, पार्टी ने अपने आदेश में इस फैसले की अलग से कोई वजह नहीं बताई है. लेकिन यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब उपचुनाव में मिली हार को लेकर पार्टी के भीतर लगातार चर्चा चल रही है. ऐसे में इसे हार के बाद संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।


कांग्रेस ने बरकरार रखी सीट
दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराया. यह सीट कांग्रेस के राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई थी. 30 जुलाई को मतदान हुआ था, जबकि 4 अगस्त को नतीजे घोषित किए गए. कांग्रेस ने यह सीट अपने पास बरकरार रखी।


बीजेपी के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
दतिया को लंबे समय से बीजेपी का मजबूत इलाका माना जाता रहा है. इस बार पार्टी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था. चुनाव प्रचार में सीएम मोहन यादव और नरोत्तम मिश्रा दोनों ने हिस्सा लिया, लेकिन पार्टी जीत नहीं सकी. इसके बाद उम्मीदवार के चयन, स्थानीय रणनीति और संगठन की भूमिका पर सवाल उठने लगे।


नतीजों में एक आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर-121 पर भी बीजेपी पीछे रह गई. यहां कांग्रेस को 291 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 264 वोट ही मिले. इसके बाद पार्टी के भीतर समीक्षा की मांग तेज हो गई. राजनीतिक गलियारों में भीतरघात और बूथ प्रबंधन को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।


दतिया में बीजेपी के पिछड़ने की मुख्य वजह
1- डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत हुई.
2- बीजेपी का ब्राह्मण कार्ड और जातीय समीकरण अपेक्षित असर नहीं दिखा सके.
3- कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम की मजबूत स्थानीय पकड़ और जनसंपर्क का फायदा मिला.
4- बीजेपी की संगठनात्मक रणनीति और बूथ प्रबंधन अपेक्षा के अनुरूप प्रभावी नहीं रहा।


पूरे जिला संगठन को एक साथ भंग करना बताता है कि बीजेपी इस हार को सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं मान रही. पार्टी अब दतिया में नई टीम के साथ नई शुरुआत करना चाहती है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नए संगठन में किन चेहरों को जगह मिलती है और पार्टी इस हार से क्या सीख लेती है।

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