
लखनऊ, 30 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि मंत्रियों के वित्तीय अधिकार बढ़ाने से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। मंत्री स्तर पर 50 करोड़, और वित्त मंत्री स्तर पर 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं मंजूर करने के अधिकार दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को अपने सरकारी आवास पर वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने राज्य की राजकोषीय स्थिति, बजट प्रबंधन, पूंजीगत व्यय, निर्माण कार्यों की व्यवस्था, और डिजिटल वित्तीय सुधारों पर चर्चा की। समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री की मंजूरी की सीमा, जो कि वर्तमान में 10 करोड़ रुपये है, बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये की जाए। इसके बाद, 50 से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की मंजूरी वित्त मंत्री द्वारा दी जाएगी, और 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर से प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक हर हाल में स्वीकृत करा लें। समय सीमा का पालन न करने वाले विभागों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी परियोजना की लागत में 15% से ज्यादा बढ़ोतरी होने पर विभाग को पुनः अनुमोदन प्राप्त करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को सुदृढ़ और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन का आदर्श राज्य बनाना है। इसके लिए सभी विभागों को समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रियाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य में राज्य गारंटी पॉलिसी लागू की जाए।
उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि अल्प-वेतनभोगी कर्मियों का मानदेय हर माह तय तारीख को उनके बैंक खातों में भेजा जाए। यह व्यवस्था जल्द लागू करने की बात कही गई है।
बैठक में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जिसमें बताया गया कि वर्ष 2023-24 में राज्य का पूंजीगत व्यय देश में सबसे अधिक था। वित्तीय अनुशासन के संकेतक एफआरबीएम मानकों के अनुरूप पाए गए। नीति आयोग के अनुसार, उत्तर प्रदेश का कंपोजिट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स भी 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हो गया है।
वित्त विभाग ने पिछले तीन वर्षों में कई डिजिटल सुधार किए हैं, जैसे कि ऑनलाइन बजट मॉड्यूल और पेपरलेस कोषागार प्रक्रियाएं। मुख्यमंत्री ने शासकीय भवनों के अनुरक्षण व्यवस्था पर भी चर्चा की और नया मानक स्थापित करने के लक्ष्य के साथ प्रदेश को भारत का सबसे सक्षम वित्तीय प्रशासन वाला राज्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने की बात की।
