
कोरबा, 17 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। धान खरीद अभियान के अंतिम पखवाड़े में अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) ने प्रदेश के कुछ जिलों में धान की रीसाइक्लिंग के मामलों के प्रकाश में सहकारी समितियों से धान के उठाव पर रोक लगा दी है। इसके कारण जिले और पूरे प्रदेश की धान खरीद व्यवस्था प्रभावित हो गई है, जिससे शनिवार को किसी भी उपार्जन केंद्र में धान उठाव के लिए वाहन नहीं पहुंच सके।
आकांक्षी जिला कोरबा में इस स्थिति का व्यापक असर देखा जा रहा है। जिले के उपार्जन केंद्रों में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया 6 लाख 56 हजार 740.40 क्विंटल धान, जिसकी कुल कीमत 151 करोड़ 5 लाख 2 हजार 920 रुपये है, फंस गया है। यदि शीघ्र उठाव नहीं हुआ तो तेज धूप के कारण धान के शार्टेज की आशंका बढ़ जाएगी, और भंडारण स्थल खाली नहीं होने से शेष किसानों की खरीद प्रभावित हो सकती है।
वर्तमान खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में कोरबा जिले को 31 लाख 19 हजार क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया था, जबकि अब तक 41 सहकारी समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 33 हजार 846 किसानों से लगभग 20 लाख 63 हजार 575.20 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। इसमें से लगभग 31.72 प्रतिशत धान अब भी उठाव के इंतजार में है।
धान उठाव पर रोक के कारण सहकारी समितियों और राइस मिलर्स को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है। कई राइस मिलर्स ने एक से दो माह के लिए बड़ी संख्या में वाहन किराए पर ले रखे हैं और उनके डिलीवरी ऑर्डर लंबित हैं। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो राइस मिलर्स द्वारा विरोध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी कोरबा ऋतुराज देवांगन ने बताया कि राइस मिलर्स के मॉड्यूल में धान लोडिंग पर रोक की सूचना प्रदर्शित हो रही है। यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की गई है और शासन स्तर पर इसका निराकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में अब तक लगभग 70 प्रतिशत धान का उठाव किया जा चुका है।
