
जगदलपुर, 17 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला जो कभी नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता था, अब बदलती परिस्थितियों के साथ तेजी से विकास कर रहा है। नक्सल गतिविधियों में भारी गिरावट के परिणामस्वरूप, इस क्षेत्र में बीते चार महीने में 20 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे हैं। यह संख्या 2025-26 के दौरान बस्तर संभाग के सभी सात जिलों में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देती है। पर्यटन मंडल के अनुसार, सितंबर 2025 से अब तक, देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों ने भी बस्तर की ओर रुख किया है।
पिछले 5 वर्षों में इस बार 7 लाख से ज्यादा पर्यटक अतिरिक्त आए हैं। 20 दिसंबर से 5 जनवरी के मध्य में ही 5 लाख से अधिक लोग यहाँ के विभिन्न पर्यटन केंद्रों का आनंद लेने पहुंचे हैं। बस्तर अब जंगलों, जलप्रपातों, आदिवासी संस्कृति और सुरक्षित वातावरण के लिए जाना जा रहा है, जिससे लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है।
हालांकि, पर्यटन में वृद्धि के साथ-साथ कुछ चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो रही हैं। कई क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे रहने की व्यवस्था, सड़कें, शौचालय, पार्किंग और खान-पान की सुविधाएं अपर्याप्त साबित हो रही हैं। स्थानीय व्यवसायियों का मानना है कि अगर समय रहते इन सुविधाओं को नहीं बढ़ाया गया, तो यह सुनहरा अवसर हाथ से निकल सकता है। बस्तर की खूबसूरती और संस्कृति अब एक बड़े ब्रांड के रूप में उभरने लगी है, इसे सही दिशा देने की आवश्यकता है।
इस बार पर्यटकों की संख्या केवल चित्रकोट, तीरथगढ़ और कांगेर घाटी तक सीमित नहीं है। बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा के भीतर जाकर भी सैलानी दिखाई दे रहे हैं। पहले जहाँ सुरक्षा कारणों से लोग जाने से कतराते थे, वहीं अब कैमरे और बैग लिए पर्यटक खुशहाल दिखाई दे रहे हैं। बस्तर में स्थाई शांति की यह असली तस्वीर है।
बस्तर के विशेषज्ञ किशोर पानीग्राही बताते हैं कि पूरा बस्तर संभाग अपनी वन-खनिज संपदा और प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। यदि बस्तर में नक्सलवाद के अंत के बाद यह रुझान जारी रहा और सुविधाएं समय पर बढ़ीं, तो आने वाले वर्षों में बस्तर देश का एक बड़ा टूरिस्ट हब बन सकता है।
