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एमसीबी: ग्राम पंचायतों में डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण बना सफलता का मॉडल

मनेंद्रगढ़, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के मार्गदर्शन में लागू किए गए इस सफल मॉडल ने गांवों की स्वच्छता को नया आयाम दिया है एवं अतिरिक्त आमदनी का एक सशक्त साधन भी प्रस्तुत किया है। ग्राम पंचायतों जैसे सलका, सीरियाखोह, पिपरिया आदि में स्वच्छाग्राहियों द्वारा डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण और पृथक्करण का कार्य प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है।
ग्राम पंचायतों के सहयोग एवं सतत निगरानी से ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य शहरी स्तर की ठोस अपशिष्ट संग्रहण व्यवस्था विकसित हो चुकी है। अब सप्ताह में दो से तीन बार कचरे का नियमित संग्रहण किया जा रहा है, जिससे चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता में सुधार आया है। लोगों में स्वच्छता की भागीदारी बढ़ी है और गांवों को गंदगी तथा दुर्गंध से निजात मिली है।
स्वच्छाग्राहियों की स्थायी आजीविका के लिए यह पहल महत्त्वपूर्ण साबित हुई है। यूजर चार्ज और प्रोत्साहन राशि के माध्यम से लगभग आठ लाख 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की गई है, जिससे श्रमिकों का आत्मबल भी बढ़ा है। स्वच्छता अब सेवा के अलावा रोजगार का एक साधन भी बन गई है।
सरपंच और सचिव की सक्रियता और निरंतर निगरानी के चलते इस अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हुआ है। डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण एवं पृथक्करण में ग्राम पंचायतों की मजबूत भागीदारी ने ग्रामीण क्षेत्रों को ओडीएफ प्लस मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। यह पहल न केवल स्वच्छता के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है।

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