रायपुर, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार देर शाम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सांसद संकुल विकास परियोजना की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि इस परियोजना के माध्यम से जनजातीय विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं, ताकि जनजातीय क्षेत्रों से पलायन को रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सांसद संकुल विकास परियोजना के अंतर्गत गांवों के क्लस्टर बनाकर विकास के एक सफल मॉडल को तैयार किया जा रहा है, जो स्थानीय लोगों को सीधे लाभान्वित करेगा। उन्होंने स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से लोगों के कौशल विकास पर जोर देते हुए कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है और यहां धान की कई किस्मों के निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। इसके साथ ही, मत्स्य पालन, बकरी पालन, गौ पालन और शूकर पालन जैसे गतिविधियों से ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सकता है। जनजातीय समुदाय द्वारा पारंपरिक रूप से उत्पादित वनोपज जैसे महुआ, इमली, और चिरौंजी का मूल्य संवर्धन कर उन्हें बाजार से जोड़ा जा रहा है।
साय ने राज्य की नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधानों की जानकारी भी दी। उन्होंने सांसद संकुल विकास परियोजना से जुड़े जनप्रतिनिधियों और विकास सहयोगियों से अनुरोध किया कि नई उद्योग नीति के लाभ जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचें।
बैठक में वी सतीश ने सांसद संकुल विकास परियोजना के लक्ष्य और विचारों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अन्य राज्यों में जनजातीय आबादी को स्वावलंबी बनाने के लिए समग्र विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सभी विभागों के अधिकारियों से गांवों के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
बैठक में रायगढ़, सरगुजा, बस्तर और बलरामपुर जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर सांसद और विधायक सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
