Friday, March 6खबर जो असर करे |
Shadow

Tag: सामाजिक न्याय

भारत में सामाजिक न्याय की नींव: संवैधानिक मूल्यों की मजबूती

भारत में सामाजिक न्याय की नींव: संवैधानिक मूल्यों की मजबूती

राष्ट्रीय
न्यूयॉर्क, 03 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री स्मृति सावित्री ठाकुर ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में सामाजिक न्याय और सामाजिक संरक्षण की नींव संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है और यह देश की दीर्घकालिक परिकल्पना विकसित भारत 2047 के अनुरूप है। सावित्री ठाकुर ने सामाजिक विकास आयोग (सीएसओसीडी) के 64वें सत्र में भारत की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में उन्होंने राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत में शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों और लड़कों की समान भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिसके लिए बेहतर स्कूल अवसंरचना और दूरदराज क्षेत्रों में आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था की गई है। पाइप पानी, स्वच्छ रसोई ईंधन और स्वच्छता सुविधाओं के बड़े पैमाने पर विस्तार से महिलाओं और कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में सुधार ...
देश के पहले बालविवाह मुक्त जिला बालोद में हो रहा था बालविवाह

देश के पहले बालविवाह मुक्त जिला बालोद में हो रहा था बालविवाह

छत्तीसगढ़, राज्य
धमतरी, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। देश का पहला बालविवाह मुक्त जिला बालोद के एक गांव में बाल विवाह शुरू हो गया था। 14 जनवरी को 20 साल का दूल्हा बारात निकलने वाला था कि धमतरी जिला बाल संरक्षण विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने बाल विवाह रूकवाया। दूल्हा के स्वजनों को बाल विवाह की कार्रवाई व जानकारी देने पर कार्रवाई रूकी, नहीं तो बाल विवाह हो जाता, क्योंकि बालोद जिले के जवाबदार अधिकारी-कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं थी। देश का पहला बालविवाह मुक्त जिला बालोद है। राज्य सरकार ने जिले के 436 ग्राम पंचायतों और नौ नगरीय निकायों को औपचारिक प्रमाण पत्र भी प्रदान कर दिया है। इसके बाद से जिले के अधिकारी-कर्मचारी जिले के कौन से गांव में बालविवाह हो रहा है इसका निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। धमतरी जिले के सजकता से बालोद जिले में हो रही बालविवाह रूक गया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी आनंद पाठक से मिली जानकारी के अनुसा...
मप्र: दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिये जिला स्तर पर आयोजित होंगे शिविर

मप्र: दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिये जिला स्तर पर आयोजित होंगे शिविर

मध्य प्रदेश, राज्य
भोपाल, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए जिला स्तर पर स्कीनिंग कैम्पों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में स्वास्थ्य विभाग 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले बच्चों को चिन्हित कर प्रमाण-पत्र प्रदान करेगा। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली वायंगणकर ने सोमवार को बताया कि जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के निर्देशों के अनुसार, किसी भी दिव्यांग बच्चे को चिन्हांकन और लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। इसलिए प्रत्येक दिव्यांग बच्चे की पहचान, स्क्रीनिंग और प्रमाणन सुनिश्चित करना आवश्यक है। सभी जिलों में इन शिविरों के आयोजन का निर्देश जिला कलेक्टर्स को दिया गया है, जो आगामी एक महीने में आयोजित किए जाने हैं। उन्होंने बताया कि शिविरों के आयोजन में विधिक सेवा प्राधिकरण, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा का समन्वि...
भारत में वामपंथी वैचारिकी, विश्वविद्यालयी आंदोलन और नक्सली समर्थन

भारत में वामपंथी वैचारिकी, विश्वविद्यालयी आंदोलन और नक्सली समर्थन

लेख
शहर, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। लेखक: LN Star Newsभारत का लोकतंत्र अपनी विविधता, मतभिन्नता और खुली बहस की परंपरा के कारण विश्व में विशिष्ट रहा है। किंतु पिछले दो दशकों में एक ऐसी वैचारिक धारा विकसित हुई है, जिसने विश्वविद्यालयों, वामपंथी छात्र संगठनों, शहरी बुद्धिजीवी समूहों और माओवादी हिंसा को व्यापक वैचारिक सूत्र में पिरो दिया है। यह विमर्श केवल छात्र-राजनीति या असहमति तक सीमित नहीं; यह राज्य-विरोध, पहचान की राजनीति, ‘क्रांतिकारी प्रतिरोध’ की संस्कृति और अंततः माओवादी सशस्त्र संघर्ष तक फैला सुनियोजित नैरेटिव बन चुका है। सबसे स्पष्ट उदाहरण दिल्ली के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया तथा हैदराबाद एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय हैं, जहाँ विमर्श का झुकाव धीरे-धीरे राष्ट्रीय दृष्टिकोण से हटकर एक प्रकार के वैचारिक अराजकवाद की ओर दिखाई देता है। जेएनयू में एसएफआई, एआईएसए, डी...