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Tag: सांस्कृतिक धरोहर

कर्नाटक के लक्कुंडी में पुरातत्व खुदाई: विदेशी एनजीओ ने संग्रहालय और विकास परियोजना में दिलचस्पी दिखाई

कर्नाटक के लक्कुंडी में पुरातत्व खुदाई: विदेशी एनजीओ ने संग्रहालय और विकास परियोजना में दिलचस्पी दिखाई

राष्ट्रीय
गदग (कर्नाटक), 02 फ़रवरी (प्रेस ब्यूरो)। कर्नाटक के गदग तालुक स्थित ऐतिहासिक लक्कुंडी गांव में पुरातत्व विभाग की खुदाई का काम लगातार 15वें दिन भी जारी है। इस दौरान प्राचीन इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण अवशेष और जानकारी सामने आ रही हैं। वीरभद्रेश्वर मंदिर के सामने चल रही खुदाई में 35 से अधिक कर्मचारी अत्यंत सावधानी और सूक्ष्मता के साथ जुटे हुए हैं। अब तक 50 से अधिक दुर्लभ पुरावशेष खोजे जा चुके हैं, जिससे लक्कुंडी के ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि हुई है। प्रतिदिन नए शिलालेख, पत्थर की संरचनाएं और प्राचीन वस्तुएं सामने आ रही हैं। खुदाई स्थल पर इतिहास प्रेमियों और स्थानीय ग्रामीणों की भी अच्छी-खासी संख्या जुटी रहती है। लक्कुंडी की चालुक्य कालीन स्मारकों के लिए प्रसिद्धता के मद्देनजर इस खुदाई से और भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रमाण मिलने की संभावना है। लक्कुंडी विकास प्राधिकरण के आयुक्त शरणु गोगेरी...
सूरजकुंड शिल्प मेला: वसुधैव कुटुंबकम का प्रतीक, उपराष्ट्रपति का उद्घाटन

सूरजकुंड शिल्प मेला: वसुधैव कुटुंबकम का प्रतीक, उपराष्ट्रपति का उद्घाटन

राष्ट्रीय
फरीदाबाद, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया। इस समारोह में उन्होंने कहा कि यह मेला भारतीय सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार को जीवंत करता है। उपराष्ट्रपति के अनुसार, यह मेला कारीगरों और लोक कलाकारों को एक साझा मंच पर लाकर उनकी पहचान को और प्रगाढ़ करता है। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले चार दशकों में यह मेला विभिन्न कलाओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस वर्ष का आयोजन आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर केंद्रित है, जिससे कारीगरों को सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मेघालय के सहभागिता की सराहना की, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का प्रतीक हैं। इस अवसर ...
गुढ़ में स्थापित शयन मुद्रा में कालभैरव की विशाल प्रतिमा, देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक

गुढ़ में स्थापित शयन मुद्रा में कालभैरव की विशाल प्रतिमा, देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक

मध्य प्रदेश, राज्य
रीवा, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश का विन्ध्य क्षेत्र प्राचीन मंदिरों और कलाकृतियों से संपन्न है। यहाँ कई शैव और जैन मंदिर दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र शैव कालीन, राजपूत कालीन, और कल्चुरि कालीन स्थापत्य कला की धारणा करता है। गुढ़ के नजदीक स्थित खामडीह गांव में भैरवनाथ बाबा की प्रतिमा, जो भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की सबसे बड़ी मूर्तियों में से एक मानी जाती है, प्राचीन मूर्तिकला का अद्वितीय उदाहरण है। इस अद्भुत मूर्ति का आकार 8.5 मीटर लंबा और 3.7 मीटर चौड़ा है, जो वर्षों से कैमोर पर्वत माला के गोद में खुले में स्थित थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आज शनिवार को इस मूर्ति और उसके साथ बने नए मंदिर का लोकार्पण किया जाएगा, जिसमें दो मंजिला भव्य मंदिर और अन्य संरचनाएँ शामिल हैं। जनसम्पर्क अधिकारी उमेश तिवारी ने जानकारी दी कि भैरवनाथ की यह महान प्रतिमा 10वीं से 11वीं शताब्दी ...