सहमति से शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं: हाईकोर्ट
प्रयागराज, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि आपसी सहमति से लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए रखने के बाद यदि रिश्ता टूटता है, तो इससे उत्पन्न निराशा पर धोखे और छल से संबंध बनाने का आरोप लगाना दंडनीय अपराध नहीं होता।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 केवल उन संबंधों को दंडित करती है जो धोखे या छल से बने हों, न कि आपसी सहमति से बने रिश्तों के टूटने से होने वाली निराशा को। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को बाद में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने झूठे वादे से संबंध बनाने की धारा 69 के तहत दर्ज अपराध को रद्द कर दिया, हालांकि अन्य धाराओं में दर्ज प्राथमिकी की विवेचना जारी रखने का आदेश दिया है। पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक याचियों की गिरफ्तारी पर रोक भी लगाई गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने ...

