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भारत का निम्न मध्यम आय से उच्च मध्यम आय श्रेणी में अग्रसर होना

भारत का निम्न मध्यम आय से उच्च मध्यम आय श्रेणी में अग्रसर होना

लेख
By: प्रहलाद सबनानी भारत आज अपने आर्थिक इतिहास के एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। पिछले कुछ दशकों के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में जिस गति से परिवर्तन और विस्तार देखने को मिला है, उसने न केवल देश के आर्थिक ढांचे को सुदृढ़ किया है बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को भी नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में भारत के निम्न मध्यम आय श्रेणी से उच्च मध्यम आय श्रेणी में परिवर्तित होने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत को निम्न आय श्रेणी से बाहर निकलकर निम्न मध्यम आय श्रेणी में पहुँचने में लगभग 60 वर्षों का समय लगा। वर्ष 1962 में भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय मात्र 90 अमेरिकी डॉलर थी, जो मिश्रित वार्षिक 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ वर्ष 2007 में बढ़कर 910 अमेरिकी डॉलर हो गई। इसी वर्ष भारत को विश्व बै...
विश्व बैंक ने 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.2 फीसदी किया

विश्व बैंक ने 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.2 फीसदी किया

आर्थिक
नई दिल्ली, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए अच्‍छी खबर है। विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और कर सुधारों के दम पर चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश की सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 फीसदी कर दिया है। यह उसके जून के अनुमान से 0.9 फीसदी ज्‍यादा है। विश्व बैंक ने जारी अपनी प्रमुख रिपोर्ट ‘वैश्विक आर्थिक संभावनाएं’ में कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगामी वित्‍त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर धीमी होकर 6.5 फीसदी रह सकती है। विश्‍व बैंक जीडीपी का ये अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि अमेरिका का 50 फीसदी आयात शुल्क इस दौरान लागू रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है, ”इसके बावजूद उम्मीद है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि...