Saturday, March 7खबर जो असर करे |
Shadow

Tag: माओवादी

धमतरी जिले में 35 प्रतिशत अपराधों में कमी आई, उत्कृष्ट कार्य करने वाले थानों को पुरस्कृत किया

धमतरी जिले में 35 प्रतिशत अपराधों में कमी आई, उत्कृष्ट कार्य करने वाले थानों को पुरस्कृत किया

छत्तीसगढ़, राज्य
धमतरी, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। पुलिस लाइन धमतरी के सभा कक्ष में सोमवार को एसपी सूरज सिंह परिहार ने जिले में वर्ष 2025 के अपराधों के बारे में वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले थानों को पुरस्कृत किया गया। एसपी सूरज सिंह परिहार ने जानकारी दी कि वर्ष 2024 में कुल 2370 अपराध प्रकरण दर्ज किए गए थे, जो वर्ष 2025 में घटकर 1529 रह गए। इस प्रकार 2024 की तुलना में कुल 35.50 प्रतिशत की कमी आई है। लूट, नकबजनी और चोरी के मामलों में भी 50 प्रतिशत कमी देखने को मिली। वर्ष 2025 के दौरान ऑपरेशन निश्चय के तहत सूखे नशे के मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है, जिसमें 10 प्रकरणों में 22 आरोपितों को गिरफ्तार कर 28.58 ग्राम हेरोइन जप्त की गई। वर्ष 2026 में सूखा नशा और अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाने की दिशा में भी ...
भारत में वामपंथी वैचारिकी, विश्वविद्यालयी आंदोलन और नक्सली समर्थन

भारत में वामपंथी वैचारिकी, विश्वविद्यालयी आंदोलन और नक्सली समर्थन

लेख
शहर, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। लेखक: LN Star Newsभारत का लोकतंत्र अपनी विविधता, मतभिन्नता और खुली बहस की परंपरा के कारण विश्व में विशिष्ट रहा है। किंतु पिछले दो दशकों में एक ऐसी वैचारिक धारा विकसित हुई है, जिसने विश्वविद्यालयों, वामपंथी छात्र संगठनों, शहरी बुद्धिजीवी समूहों और माओवादी हिंसा को व्यापक वैचारिक सूत्र में पिरो दिया है। यह विमर्श केवल छात्र-राजनीति या असहमति तक सीमित नहीं; यह राज्य-विरोध, पहचान की राजनीति, ‘क्रांतिकारी प्रतिरोध’ की संस्कृति और अंततः माओवादी सशस्त्र संघर्ष तक फैला सुनियोजित नैरेटिव बन चुका है। सबसे स्पष्ट उदाहरण दिल्ली के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया तथा हैदराबाद एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय हैं, जहाँ विमर्श का झुकाव धीरे-धीरे राष्ट्रीय दृष्टिकोण से हटकर एक प्रकार के वैचारिक अराजकवाद की ओर दिखाई देता है। जेएनयू में एसएफआई, एआईएसए, डी...