उमरिया, 14 अक्टूबर (हि.स.)। मप्र के उमरिया जिले के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र के आसपास बसे 32 गांवों के किसानों में बीते कई महीनों से जंगली हाथियों और अन्य वन्यजीवों से फसल नुकसान और जानमाल के खतरे को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। इन्हीं समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर आज सैकड़ों किसान नारेबाजी करते हुए उमरिया कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाना चाहते थे।
किसानों का कहना है कि बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन और वन विभाग की लापरवाही के कारण जंगली हाथियों, सूअरों और बाघों द्वारा फसलों एवं संपत्ति को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है, परंतु प्रशासन से उन्हें न तो राहत मिल रही है और न ही मुआवजा। किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर से मिलने का प्रयास किया, किन्तु कलेक्टर द्वारा मिलने से इनकार किए जाने पर किसान कलेक्ट्रेट गेट पर ही धरने पर बैठ गए और “कलेक्टर होश में आओ” के नारे लगाने लगे।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। इस दौरान अधीक्षक भू-अभिलेख अधिकारी ज्ञापन लेने पहुंचे, किन्तु किसानों ने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई और ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। लगभग शाम 6 बजे तक इंतजार करने के बाद किसानों ने बिना ज्ञापन सौंपे ही कलेक्ट्रेट परिसर से लौटने का निर्णय लिया।
ग्राम रायपुर से आए किसान चंद्रशेखर शुक्ला ने बताया कि “हम लोग जंगली हाथी, सूअर और बाघ से परेशान हैं। हाथी हमारी फसलें बर्बाद कर रहे हैं, जबकि वन विभाग कहता है कि राजस्व विभाग से मुआवजा लो। तीन हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा बताया जाता है, लेकिन यह राशि बीज और मजदूरी तक की भरपाई नहीं कर पाती। हमारी डेढ़ लाख की फसल बर्बाद होती है और सरकार केवल तीन हजार रुपये देने की बात करती है। यह हमारे साथ अन्याय है।”
इसी प्रकार, ग्राम डोड़का के किसान समरजीत द्विवेदी ने कहा, “बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रहा। हाथी हमारे खेतों में घुस आते हैं, फसलें बर्बाद कर देते हैं, लेकिन न कोई अधिकारी आता है, न कोई मुआवजा देता है। हम चाहते हैं कि वन विभाग ही फसलों के नुकसान का पंचनामा करे और मुआवजा दे, जैसे पशुधन के नुकसान पर दिया जाता है।”
किसानों का आरोप है कि प्रशासन समस्याओं से भाग रहा है और किसानों की सुनने को तैयार नहीं है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो वे आत्मदाह जैसे कठोर कदम उठाने को विवश होंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि कलेक्टर का यह रवैया जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच असंतोष को जन्म दे रहा है। एक स्थानीय किसान नेता ने कहा, “कलेक्टर जनता की सेवा के लिए हैं, उनसे जनता मिलने आई तो उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शर्मनाक है।”
गौरतलब है कि संयुक्त किसान संघर्ष समिति, बांधवगढ़ क्षेत्र, जिला उमरिया (म.प्र.) की ओर से दिए गए ज्ञापन में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास पिछले कई महीनों से हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। कई गांवों में फसलों का भारी नुकसान हुआ है और कई लोगों को चोटें भी आई हैं। किसानों की मुख्य मांग है कि जंगली हाथियों से फसल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, फसल नुकसान का मुआवजा वन विभाग से दिया जाए, प्रभावित गांवों का सर्वे कर वास्तविक क्षति का मूल्यांकन किया जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीव नियंत्रण दलों की गश्त बढ़ाई जाए, प्रशासन स्तर पर किसानों के साथ जनसुनवाई आयोजित की जाए।
किसानों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे आने वाले दिनों में 25 हजार से अधिक किसानों के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
