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एपस्टीन दस्तावेज़ों में नस्लवादी टिप्पणी का खुलासा: नॉर्वे के पूर्व राजनयिक का भारतीयों पर आपत्तिजनक ईमेल


वाशिंगटन। जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ों के सार्वजनिक होने के बाद एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा जारी लाखों फाइलों में नॉर्वे के पूर्व शीर्ष राजनयिक टेर्जे रॉड-लार्सन का एक ईमेल मिला है, जिसमें भारतीयों के खिलाफ बेहद अपमानजनक और नस्लवादी टिप्पणी की गई थी।

दस्तावेज़ों के अनुसार, 25 दिसंबर 2015 को रॉड-लार्सन ने कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन को एक ईमेल भेजा था। यह टिप्पणी उस समय की गई थी, जब एपस्टीन ने उन्हें एक भारतीय राजनेता से जुड़ा ईमेल फॉरवर्ड किया था। सामने आए शब्दों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

फाइलें खुलते ही सोशल मीडिया में आक्रोश

एपस्टीन से जुड़ी करीब 30 लाख फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद कई प्रभावशाली और चर्चित हस्तियों के नाम फिर से बहस के केंद्र में आ गए हैं। रॉड-लार्सन के ईमेल को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे घृणित, शर्मनाक और नस्लवादी करार दिया है। कई यूज़र्स का कहना है कि यह टिप्पणी न सिर्फ भारतीयों का अपमान है, बल्कि यह उस सोच को भी उजागर करती है, जो वर्षों तक बंद दरवाज़ों के पीछे छिपी रही।

कौन हैं टेर्जे रॉड-लार्सन

टेर्जे रॉड-लार्सन नॉर्वे के जाने-माने राजनयिक रहे हैं। वे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के पूर्व अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत भी रह चुके हैं। 1993 में इज़रायल और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के बीच हुए ओस्लो शांति समझौते में उनकी भूमिका को अहम माना जाता है।
जेफरी एपस्टीन से संबंध सामने आने के बाद उन्होंने वर्ष 2020 में IPI के पद से इस्तीफा दे दिया था।

क्या है जेफरी एपस्टीन मामला

जेफरी एपस्टीन एक प्रभावशाली वित्तीय कारोबारी था, जिसके दुनिया भर के ताकतवर लोगों से संबंध थे। उसके खिलाफ जांच 2005 में शुरू हुई, जब एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण का आरोप सामने आया।
2008 में उसे नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों में दोषी ठहराया गया और 18 महीने की सजा हुई, हालांकि वह जल्द ही रिहा हो गया।

इसके बाद कई पीड़िताओं ने उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। 2019 में उसे संघीय यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया, लेकिन उसी साल न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। आधिकारिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया, हालांकि आज भी इस पर सवाल उठते हैं।

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