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केंद्र सरकार ने पुरानी श्रम कानूनों को समाप्त करने की जानकारी दी

नई दिल्ली, 02 फ़रवरी (प्रेस ब्यूरो)। दिल्ली उच्च न्यायालय में सोमवार को नए श्रम कानूनों को बिना तैयारी के लागू करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि नए श्रम कानूनों को लागू करने के लिए इस महीने के अंत तक नियम बनाए जाएंगे और तब तक वर्तमान श्रम न्यायालय काम करते रहेंगे।

याचिका के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच से कहा कि अदालत के आदेश के अनुसार केंद्र सरकार ने आज ही दो नोटिफिकेशन जारी किए हैं, जिसमें पुराने कानून को 21 नवंबर, 2025 से समाप्त कर दिया गया है और उसकी जगह नए कानून लागू किए गए हैं। मेहता ने बताया कि नए कानून के नियम प्रभावी होने तक वर्तमान श्रम न्यायालयों को कार्य करने के लिए कहा गया है।

एसजी ने यह भी कहा कि श्रम कानूनों को लागू करने के लिए इस महीने के अंत तक रूल्स बना लिए जाएंगे और लोगों से नए नियम को लेकर राय मांगी गई है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील रविंद्र एस. गरिया ने विरोध करते हुए कहा कि जब तक नए नियम लागू नहीं होते, तब तक पुराने कानून लागू रहने चाहिए, क्योंकि पुराने कानून के खत्म होने के बाद नए नियम न लागू होने तक एक शून्य की स्थिति उत्पन्न होगी, जिससे देश में कोई भी श्रम कानून प्रभावी नहीं रहेगा। गरिया ने कोर्ट से आग्रह किया कि पुराने श्रम कानूनों को नए नियम बनने तक प्रभावी रखने का आदेश जारी किया जाए, लेकिन कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश देने से मना कर दिया।

उच्च न्यायालय ने 12 जनवरी को केंद्र सरकार की नए श्रम कानूनों को स्थगित करने के ताजा नोटिफिकेशन में बदलाव करने के लिए सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि आपने हमारे पिछले आदेश का पालन नहीं किया। याचिकाकर्ता के वकील रविंद्र एस. गरिया ने कहा था कि केंद्र ने 8 दिसंबर, 2025 के नोटिफिकेशन में कोई सुधार नहीं किया है। यदि नोटिफिकेशन में सुधार नहीं होगा, तो नए कानून कैसे लागू हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्यूटी एक्ट, ट्रेड यूनियन एक्ट समेत कई कानूनों पर नया नोटिफिकेशन चुप है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र के रवैये पर नाराजगी जताई थी, यह कहते हुए कि आपके नोटिफिकेशन में कई कमियां थीं।

कोर्ट ने 3 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका वकील एनए सेबेस्टियन और सुनील कुमार ने दायर की थी। याचिकाकर्ता के वकील रविंद्र एस. गरिया ने बताया कि 29 से ज्यादा श्रम कानूनों को समाप्त कर 21 नवंबर को नए चार श्रम कानूनों को लाया गया है। याचिका में कहा गया था कि नए श्रम कानूनों में लेबर कोर्ट को खत्म कर उनके स्थान पर लेबर ट्रिब्यूनल का प्रावधान किया गया है। लेबर कोर्ट में लंबित मामलों को लेबर ट्रिब्यूनल में ट्रांसफर किया जाएगा, जिसमें एक न्यायिक अधिकारी और एक एसोसिएट सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। गरिया ने कहा कि नए श्रम कानूनों को लागू तो कर दिया गया है लेकिन नियम नहीं बनाए गए हैं। लेबर ट्रिब्यूनल का गठन भी नहीं किया गया है। गरिया ने कहा कि नए श्रम कानूनों को बिना सही से लागू किए गया।

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