
नई दिल्ली, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और एसआईआर प्रक्रिया के प्रभावित व्यक्तियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल था।
मुलाकात के बाद ममता ने मीडिया के समक्ष केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर कार्य कर रहा है। ममता ने टिप्पणी की कि कठिन सवालों के जवाब देने या प्रक्रिया से उत्पन्न तबाही की जिम्मेदारी लेने के बजाय, मुख्य चुनाव आयुक्त ने टालमटोल और अहंकार का रास्ता अपनाया है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अब एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय नहीं रह गया है बल्कि यह भाजपा का एक राजनीतिक विस्तार बन गया है, जो बंगाल के मतदाताओं को मिटाने और लोकतंत्र में धांधली करने के अपने एजेंडों को पूरा कर रहा है। ममता ने स्पष्ट किया कि बंगाल झुकने वाला नहीं है और उन्होंने चेतावनी दी कि मताधिकार को छीनने की इस साजिश का सामना किया जाएगा।
ममता ने दावा किया कि यह लड़ाई केवल एक राज्य या पार्टी की नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान अनेक गड़बड़ियां हुई हैं, और इसे असंगत, भ्रामक और अलोकतांत्रिक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रियाएं लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने सवाल किया कि “क्या आडवाणी जी अपने माता-पिता का जन्म प्रमाण पत्र प्रदान कर सकते हैं?” यह पूरी प्रक्रिया गलत और अव्यावहारिक है।
ममता ने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 150 से अधिक व्यक्तियों की मौत हुई, जिनमें बूथ लेवल ऑफिसर शामिल हैं। इस प्रक्रिया ने आम लोगों पर असहनीय दबाव डाला है। उन्होंने बताया कि वे 100 लोगों को साथ लेकर आई हैं, जिनमें कई ऐसे हैं जिन्हें मतदाता सूची में मृत घोषित किया गया है, जबकि वे जिंदा हैं और मौक़े पर मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग अपनी कार्यवाहियों के लिए सही ठहराने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इसमें पारदर्शिता का अभाव है। यदि आयोग को एसआईआर करना ही था, तो उसे चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर सही योजना बनानी चाहिए थी। ममता ने यह आरोप लगाया कि लगभग 2 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिसे उन्होंने लोकतंत्र के लिए एक सीधा हमला बताया है।
