
कांकेर, 02 फ़रवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नक्सल प्रभावित कोयलीबेड़ा इलाके से 18 ग्राम पंचायतों के 68 गांव के ग्रामीणों ने 5 सूत्रीय मांगों को लेकर आज सोमवार को कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर धरना प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा।
कोयलीबेड़ा क्षेत्र नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में से एक है। यहाँ नक्सलियों की दहशत के चलते विकास की संभावना न्यूनतम रही है। सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ शांति और विकास के लिए अभियान चलाया है। अब जब नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, तो ग्रामीणों की उम्मीदें उच्च हो गई हैं और वे सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कोयलीबेड़ा ब्लॉक का मुख्यालय होने के बावजूद, यहाँ कोई अधिकारी नहीं बैठता। सभी कार्यालय और अधिकारी 50 किलोमीटर दूर पखांजूर में कार्यरत हैं, जिससे गाँव के लोगों को रोज़ लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। उनकी मांगें अब तक केवल मांगें ही बनी हुई हैं। इसके साथ ही, 68 गांव के बच्चों को उचित शिक्षा भी नहीं मिल रही है।
स्कूलों की स्थिति दयनीय है और ग्रामीणों ने लंबे समय से महाविद्यालय की मांग की है। बारहवीं कक्षा के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर जाना पड़ता है, जो आर्थिक समस्याओं के कारण कई बच्चों को पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर कर देता है। स्वास्थ्य facilities की भी स्थिति खराब है, जहाँ केवल एक एम्बुलेंस है और महिला डॉक्टर सहित अन्य डॉक्टर्स की कमी है।
जनता कृषि कार्यों पर निर्भर है और वे सरकार की योजनाओं के तहत अपनी उपज बेचते हैं, लेकिन पैसे केवल 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर में बुधवार को ही मिलते हैं। भुगतान नहीं मिल पाने पर किसान वापस लौटने पर मजबूर होते हैं। ग्रामीणों ने सहकारी बैंकों के कार्यान्वयन की मांग की थी, जो अब तक बिना किसी प्रगति के लंबित है।
ग्रामीणों का कहना है कि ये उनकी जायज माँगें हैं, जिन्हें यदि सरकार और प्रशासन नजरअंदाज करते हैं, तो वे आने वाले समय में उग्र आंदोलन का सहारा लेने के लिए बाध्य होंगे।
