
नई दिल्ली, 02 फ़रवरी (प्रेस ब्यूरो)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही को निरस्त करने के केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
कैट ने 19 जनवरी को अपने आदेश में समीर वानखेड़े के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को निरस्त कर दिया था। कैट ने कहा था कि समीर वानखेड़े के खिलाफ बिना प्रक्रियाओं का पालन किए ही अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी। कैट ने कहा था कि 18 अगस्त, 2025 को समीर वानखेड़े के खिलाफ जारी आरोप पत्र प्रक्रियाओं का दुरुपयोग है। कैट ने कहा कि आरोप पत्र में जो तथ्य पेश किए गए हैं वो विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही का आधार नहीं बन सकते हैं। केंद्र सरकार ने कैट के इसी आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। केंद्र सरकार ने कहा है कि समीर वानखेड़े के खिलाफ दिया गया आरोप पत्र किसी प्रतिबंधित तथ्य के आधार पर नहीं जारी किया गया था बल्कि समीर वानखेड़े की ओर से पेश उस कॉल रिकॉर्ड के आधार पर था जो उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय में दाखिल की थी।
समीर वानखेड़े उस समय सुर्खियों में आए थे जब एनसीबी मुंबई की टीम ने कुछ बॉलीवुड हस्तियों से पूछताछ की थी। समीर वानखेड़े ने शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को क्रूज पर ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। आर्यन खान को क्लीन चिट मिलने के बाद समीर वानखेड़े का ट्रांसफर कर दिया गया था। समीर वानखेड़े ने आर्यन खान ड्रग्स मामले से जुड़े वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में अपने चित्रण को लेकर नेटफ्लिक्स, शाहरुख खान और सीरीज के निर्माताओं के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया है।
