
नई दिल्ली, 02 फ़रवरी (प्रेस ब्यूरो)। उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि सोनम वांगचुक के बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और लॉ एंड आर्डर के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच से कहा कि सोनम वांगचुक को जनमत संग्रह की मांग करके जहर फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
एसजी ने वांगचुक के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इलाके को ठप करने से रोकना जरुरी है। क्या वांगचुक चाहते हैं कि लद्दाख, नेपाल और बांग्लादेश बन जाए। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वांगचुक युवाओं को आत्मदाह के लिए उकसा रहे थे। ऐसे कामों की इजाजत नहीं दी जा सकती है। मेहता ने कहा कि सोनम वांगचुक पाकिस्तान और चीन से घिरे इलाके में बैठकर कह रहे हैं कि भारतीय सेना कमजोर है। ये बयान काफी आपत्तिजनक हैं।
सुनवाई के दौरान 8 जनवरी को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चौरी-चौरा कांड का जिक्र करते हुए कहा था कि हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल तत्काल वापस ले लिया था। आपको याद होगा कि गांधीजी ने भी ऐसा ही किया था। जब चौरी-चौरा की घटना के बाद हिंसा हुई थी, तो उन्होंने भी बिल्कुल वैसा ही किया था। सिब्बल ने कहा कि हिरासत में लेने के 28 दिन बाद उनको हिरासत में लेने के आधार बताए गए जो कानूनी समय-सीमा का साफ उल्लंघन है। सिब्बल ने कहा कि कानून यह है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर हिरासत में लिया गया है अगर आरोपी को उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो हिरासत का आदेश रद्द हो जाता है। उच्चतम न्यायालय ने अपने कई फैसलों में यह बात कही है।
याचिका सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने दायर किया है। याचिका में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है। सोनम वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल, सोनम वांगचुक राजस्थान के जोहरपुर जेल में बंद हैं। गीतांजलि ने अपने पति को रिहा करने की मांग की है। गीतांजलि ने याचिका में कहा है कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के एक हफ्ते के बाद भी उनके स्वास्थ्य के बारे में उन्हें कोई सूचना नहीं है।
सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे। लद्दाख में हुई हिंसा के बाद हुई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी।
