
कोलकाता, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। केंद्र सरकार के आम बजट 2026-27 में चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल को इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, निर्यात और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर कई अहम सौगातें मिली हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए राज्य के लिए फ्रेट कॉरिडोर, हाई-स्पीड रेल, औद्योगिक कॉरिडोर, एमएसएमई सहायता और चाय श्रमिकों के कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों की घोषणा की। अब एक दिन बाद इस पर पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विश्लेषकों ने विस्तार से अपनी राय रखी है.
निर्यात क्षेत्र को बड़ी राहतबजट में निर्यात क्षेत्र के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। समुद्री उत्पादों के निर्यात के लिए उपयोग होने वाले कच्चे माल पर ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा को पहले के एक प्रतिशत से बढ़ाकर तीन प्रतिशत कर दिया गया है। यह सीमा पिछले वर्ष के निर्यात कारोबार के एफओबी मूल्य के आधार पर तय होगी।
इसके अलावा, लेदर या सिंथेटिक फुटवियर के साथ-साथ अब शू अपर के निर्यात पर भी ड्यूटी-फ्री आयात की सुविधा दी गई है। लेदर और टेक्सटाइल गारमेंट्स तथा लेदर और सिंथेटिक फुटवियर निर्यातकों को अब अंतिम उत्पाद के निर्यात के लिए छह महीने की जगह एक वर्ष का समय मिलेगा।
पश्चिम बंगाल से समुद्री उत्पाद और लेदर का संयुक्त निर्यात 13 से 15 हजार करोड़ रुपये के बीच है, जिससे शहरी और तटीय ग्रामीण जिलों में लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।
अर्जुन कुलकर्णी, इंडियन लेदर प्रोडक्ट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि इस फैसले से लेदर निर्यात में दो से तीन प्रतिशत तक मार्जिन बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि लेदर निर्यात में आयातित कच्चे माल की हिस्सेदारी 10 से 12 प्रतिशत तक होती है।
वहीं, सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय प्रबंध समिति के सदस्य राजर्षि बनर्जी ने कहा कि यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन समुद्री उत्पाद क्षेत्र के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इस सेक्टर में आयात लागत बड़ा कारक नहीं होती।
चाय उद्योग और श्रमिकों को राहतबजट में चाय उद्योग से जुड़े श्रमिकों की बेहतरी पर भी ध्यान दिया गया है। पश्चिम बंगाल के चाय उद्योग ने प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना को एक और वर्ष के लिए बढ़ाए जाने का स्वागत किया है। इस योजना से खासतौर पर महिला और बच्चों को लाभ मिलेगा।
हालांकि, बजट में असम के चाय बागान श्रमिकों के लिए परिवार पेंशन और जीवन बीमा से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की घोषणा भी की गई है, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों में श्रमिक कल्याण को बल मिलेगा।
फ्रेट कॉरिडोर और हाई-स्पीड रेल से बदलेगा कनेक्टिविटी का नक्शाइंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर बजट में पश्चिम बंगाल के लिए दो बड़े ऐलान किए गए हैं। पहला, हुगली जिले के डानकुनी से गुजरात के सूरत तक एक समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव है। इससे पूर्वी भारत के उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
दूसरा अहम प्रस्ताव सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का है। इनमें एक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के वाराणसी से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी को जोड़ेगा। यह कॉरिडोर प्रमुख आर्थिक केंद्रों, आईटी हब, औद्योगिक क्लस्टर और उभरते शहरों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
बजट में एकीकृत ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की भी घोषणा की गई है, जिसमें दुर्गापुर को एक प्रमुख औद्योगिक नोड के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे ‘पूर्वोदय’ विजन के तहत पश्चिम बंगाल की भूमिका और मजबूत होगी।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पूर्वोदय राज्यों में पांच पर्यटन स्थलों के विकास और चार हजार इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिससे शहरी परिवहन को नई दिशा मिलेगी।
एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावाएमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बजट में 10 हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड और नेशनल फाइबर स्कीम की घोषणा की गई है।
कोलकाता स्थित डॉलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विनोद कुमार गुप्ता ने कहा कि ये दोनों कदम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देंगे। उन्होंने कहा कि नेशनल फाइबर स्कीम से प्राकृतिक और मानव निर्मित फाइबर की घरेलू उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे श्रम-प्रधान होजरी उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और सतत विकास के साथ रोजगार सृजन होगा।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 में पश्चिम बंगाल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और निर्यात के क्षेत्र में कई दीर्घकालिक प्रस्ताव किए गए हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में और विशेष पैकेज की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम राज्य की आर्थिक रफ्तार को नई दिशा देने में अहम साबित होंगे।
