
वाराणसी, 03 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। 03 फरवरी 1916 का दिन भारतीय शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की स्थापना की गई थी। इस विश्वविद्यालय की बुनियाद डॉ एनी बेसेंट, काशी नरेश प्रभु नारायण सिंह और महाराजा रामेश्वर सिंह के सहयोग से रखी गई।
बीएचयू की स्थापना 1915 के संसदीय अधिनियम के अंतर्गत की गई थी और इसका शिलान्यास काशी नरेश द्वारा प्रदत्त भूमि पर हुआ। विश्वविद्यालय का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा को भारतीय संस्कृति, परंपरा और विरासत के साथ जोड़ना था, जो इसे अन्य संस्थानों से अलग बनाता है।
इसका विस्तृत परिसर करीब 1300 एकड़ में फैला हुआ है और इसकी वास्तुकला की भव्यता के चलते इसे ‘सर्वविद्या की राजधानी’ के नाम से भी जाना जाता है। इसे एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय माना जाता है।
अक्टूबर 1917 से यहां सेंट्रल हिंदू कॉलेज के रूप में विधिवत शिक्षण शुरू हुआ। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, बीएचयू न केवल शिक्षा का केंद्र था, बल्कि यह राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का प्रमुख केंद्र भी बन गया। आज भी, यह विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और भारतीय मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
