
संभल, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल हिंसा मामले में **सीजेएम** कोर्ट ने तत्कालीन **सीओ अनुज चौधरी** और **इंस्पेक्टर अनुज तोमर** समेत **20** से अधिक पुलिस कर्मियों पर **एफआईआर** दर्ज करने का दिया आदेश। जनपद संभल की **सदर कोतवाली** क्षेत्र में स्थित **शाही जामा मस्जिद** के दूसरे सर्वे के दौरान **24 नवंबर 2024** को हुई हिंसा के दौरान एक युवक को गोली लगने के मामले में युवक के पिता की याचिका पर **सीजेएम** कोर्ट के न्यायाधीश **विभांशु सुधीर** ने तत्कालीन **सीओ संभल अनुज चौधरी** और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी **अनुज तोमर** समेत **20** से अधिक पुलिसकर्मियों के विरुद्ध **एफआईआर** दर्ज करने के आदेश पारित किए हैं।
संभल हिंसा मामले में **चंदौसी** की **सीजेएम** कोर्ट ने तत्कालीन **सीओ अनुज चौधरी** और **इंस्पेक्टर अनुज तोमर** समेत **20** से अधिक पुलिसकर्मियों पर **एफआईआर** दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश घायल युवक **आलम** के पिता **यामीन** की याचिका पर आया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि **आलम** को गोली मारी गई थी।

उत्तर प्रदेश के **संभल** में हुई हिंसा से जुड़े मामले में अदालत के आदेश के बाद नया मोड़ आ गया है। **चंदौसी** स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (**सीजेएम**) **विभांशु सुधीर** ने तत्कालीन **सीओ अनुज चौधरी** और **इंस्पेक्टर अनुज तोमर** समेत **20** से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ **एफआईआर** दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह आदेश हिंसा में घायल युवक के पिता **यामीन** की याचिका पर दिया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि **आलम** नाम का युवक सामान बेचने गया था, उसी दौरान उसे गोली मार दी गई। **यामीन** ने अपनी अर्जी में तत्कालीन **सीओ अनुज चौधरी** और संभल सदर कोतवाली के तत्कालीन **इंस्पेक्टर अनुज तोमर** सहित **20** से अधिक पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। अदालत ने सभी तथ्यों पर सुनवाई के बाद पुलिसकर्मियों पर **एफआईआर** दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता **कमर हुसैन** ने बताया कि याचिका कर्ता **यामीन** की याचिका पर सुनवाई करते हुए **सीजेएम** न्यायालय के न्यायाधीश ने तत्कालीन **सीओ अनुज चौधरी** और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी संभल **अनुज तोमर** समेत **20** से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ **एफआईआर** दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही मुकदमा दर्ज करके **सात दिन** के अंदर न्यायालय को अवगत भी कराना है।
