
दिल्ली, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नए श्रम कानूनों के नोटिफिकेशन को लेकर केंद्र सरकार की सुस्ती पर नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र से कहा कि उसने पिछले आदेश का पालन नहीं किया है। मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी को होगी। आज उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील रविंद्र एस गरिया ने बताया कि केंद्र ने 8 दिसंबर के नोटिफिकेशन में कोई सुधार नहीं किया है। वकील ने यह भी कहा कि नए कानून कैसे लागू हो सकते हैं जब नोटिफिकेशन में आवश्यक सुधार नहीं किए गए। कोर्ट ने केंद्र के नोटिफिकेशन में कमियों पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि नए कानून को लागू करने के लिए पूर्व कानून को निरस्त किए बिना और नए नियम बनाए बिना यह संभव नहीं है। एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि अदालती सवालों के जवाब देने में असमर्थ रहे, जिससे मामला फिर से सुनवाई के लिए रोका गया। सुनवाई के दौरान श्रम मंत्रालय के उप सचिव को भी तलब किया गया। चीफ जस्टिस ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड की धारा 104 के अनुसार पिछला कानून निरस्त किए बिना नया कोड लाना संभव नहीं है। पहले 11 दिसंबर को उच्च न्यायालय ने केंद्र के नोटिफिकेशन को अपर्याप्त करार दिया था और कहा था कि केंद्र को श्रम कानूनों के विषय में विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए। यह याचिका वकील एनए सेबेस्टियन और सुनील कुमार द्वारा दायर की गई थी, जिसमें नए चार श्रम कानूनों की आलोचना की गई है और लेबर ट्रिब्यूनल के गठन की मांग की गई है।
