
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में घने जंगलों और ऊँची-नीची पहाड़ियों के बीच स्थित सिद्ध बाबा धाम अब सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, इतिहास, और विकास की जीवंत कहानी बन चुका है। मकर संक्रांति के अवसर पर यह स्थान श्रद्धालुओं से भर जाता है और पूरा क्षेत्र भक्ति और उल्लास में डूब जाता है।
कुछ वर्ष पहले तक यह प्राचीन शिव मंदिर समय की चुनौतियों का सामना कर रहा था, वहीं आज यह केदारनाथ धाम की तर्ज पर बनाए गए भव्य मंदिर के रूप में श्रद्धालुओं का आकर्षण बन चुका है। रात्रि में जब यह मंदिर रोशनी से जगमगाता है, तो मानो पर्वत पर दिव्यता की छा जाती है।

स्थानीय पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के नोडल अधिकारी और इतिहासकार डॉ. विनोद पांडेय के अनुसार, सिद्ध बाबा धाम की आस्था की जड़ें वर्ष 1928 से जुड़ी हुई हैं। उस समय कारीमाटी क्षेत्र में कोयला खनन का कार्य प्रारंभ हुआ और उत्तर प्रदेश तथा बिहार से आए श्रमिकों ने इस पर्वत पर शिवलिंग की पूजा शुरू की। धीरे-धीरे यहां साधु-संतों का आवागमन होने लगा और उन्होंने वर्षों तक साधना की।
जनसहयोग से इस मंदिर का कायाकल्प हुआ है। स्थानीय मंदिर समिति और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से मंदिर में बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। आज सिद्ध बाबा धाम धार्मिक पर्यटन के एक उभरते केंद्र के रूप में उभरा है।

मकर संक्रांति के दिन इस स्थान का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है। हजारों श्रद्धालु तिल-गुड़ अर्पित कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है जहां जाति-धर्म से परे सभी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। मेले में पूजा सामग्री और पारंपरिक व्यंजनों की दुकानों से रौनक बनी रहती है।
सीमाओं से परे आस्था की इस तात्कालिकता के कारण छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहाँ पहुंचते हैं। जिला प्रशासन और पुलिस की सक्रियता व्यवस्थाओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है।
आज सिद्ध बाबा धाम एक ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और आधुनिक सुविधाओं का संगम बन चुका है, जिससे इसकी धार्मिक पहचान और भी मजबूत होती जा रही है। मकर संक्रांति पर उमड़ती भीड़ इस बात का प्रमाण है कि सिद्ध बाबा धाम आने वाले समय में जिले के धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र बनेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह
