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ग्रामीण रोजगार को सतत विकास का साधन बनाता वीबी-जीरामजी अधिनियम: जगदीश देवड़ा

जबलपुर, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि एनडीए सरकार ने विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत वीबी-जीरामजी अधिनियम को लागू किया है, जो कि मनरेगा के स्थान पर है और ग्रामीण रोजगार को सतत विकास का साधन बनाता है। सोमवार को जबलपुर जिले के प्रभारी मंत्री देवड़ा ने संभागीय भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि यह अधिनियम विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप बनाया गया है।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश पार्टी के अनेक नेता भी मौजूद थे। देवड़ा ने बताया कि ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों ने भारतीय समाज की आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि मनरेगा ने काम से जुड़े कई पहलुओं को संबोधित किया है, लेकिन इसके लंबे समय के प्रभाव में प्रशासनिक कमजोरियों और भ्रष्टाचार के कारण बाधाएं आईं।

उन्होंने कहा कि वीबी-जीरामजी अधिनियम, रामराज्य स्थापित करने की दिशा में कदम है। नए कानून में अधिक काम के दिन और तुरंत मजदूरी भुगतान की व्यवस्था की गई है, जिससे हर ग्रामीण परिवार को सालाना 125 दिन का रोजगार मिलेगा।

देवड़ा ने बताया कि इस अधिनियम में जल सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और जलवायु अनुकूल कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, जिससे ग्रामीण जीवन में सुधार होगा। उन्होंने समारोह में कांग्रेस पर भी तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने कभी भी अपने नामों पर योजनाओं का नामकरण नहीं किया और विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।

उन्होंने कहा कि नई योजना में साप्ताहिक भुगतान की व्यवस्था होगी, जिससे मजदूरों को समय पर भुगतान मिल सकेगा। इस तरह के विकासात्मक कदमों से देश को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में मजबूती मिलेगी।

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