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बैंक कर्ज घोटाला: 11 साल बाद मिली राहत, ईडी ने बैंक को दिलाई 1.44 करोड़ की संपत्ति

शिमला, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)।
लेखक: LN Star News
फर्जी दस्तावेजों के सहारे लिए गए बैंक कर्ज के एक पुराने मामले में 11 साल बाद बैंक को बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय शिमला की कार्रवाई के बाद बैंक ऑफ इंडिया को 1.44 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति वापस मिली है। यह मामला ऊना जिले की अरविंद कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। उस पर वर्ष 2014 में बैंकों से धोखाधड़ी कर ऋण लेने और उसकी अदायगी न करने के आरोप लगे थे।
इस पूरे मामले की शुरुआत 19 मई 2014 को हुई जब ऊना जिले के हरोली थाना में अरविंद कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोप था कि कंपनी ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज हासिल करने के लिए जाली और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। बाद में न तो ऋण की शर्तों का पालन किया गया और न ही समय पर भुगतान किया गया। इससे बैंकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि वर्ष 2014 में कंपनी और उससे जुड़े लोगों ने गलत जानकारी देकर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए क्रेडिट सुविधाएं प्राप्त कीं। जांच एजेंसी के अनुसार ऋण की राशि का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया, जिसके लिए उसे मंजूरी दी गई थी। वहीं धन को अन्य संबंधित संस्थाओं में स्थानांतरित कर दिया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में पहले 3.51 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। बाद में धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत सक्षम न्यायिक प्राधिकरण ने इन कुर्की आदेशों की पुष्टि भी कर दी। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने 15 जून 2020 को धर्मशाला स्थित विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की और इस पर अदालत ने 1 मार्च 2021 को संज्ञान लिया।
पीड़ित बैंकों को राहत दिलाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने कानून की मंशा के अनुरूप विशेष न्यायालय के समक्ष आपत्ति न होने का आवेदन दिया। इसमें बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में कुर्क की गई संपत्तियों का एक हिस्सा सौंपने का अनुरोध किया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को बताया कि यह संपत्ति अपराध से अर्जित धन का हिस्सा है और इसे वैध दावेदार को लौटाया जाना चाहिए।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर सुनवाई के बाद धर्मशाला स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने ये आदेश पारित किया। अदालत के आदेश के तहत 1.44 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति बैंक ऑफ इंडिया को सौंप दी गई।

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