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Tag: सेना दिवस

जयपुर में पहली बार हुई सेना दिवस परेड, हजारों लोगों ने नजदीक से देखे अत्याधुनिक हथियार

जयपुर में पहली बार हुई सेना दिवस परेड, हजारों लोगों ने नजदीक से देखे अत्याधुनिक हथियार

राष्ट्रीय
जयपुर, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। भारतीय सेना की 78वीं सेना दिवस परेड बुधवार को पहली बार आर्मी एरिया से बाहर जयपुर में जगतपुरा के महल रोड पर आयोजित की गई। परेड को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर हजारों लोग उमड़े। परेड के दौरान सेना की आधुनिक सैन्य शक्ति और परंपरागत शौर्य का प्रदर्शन किया गया। आम लोगों ने ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर और अन्य अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों को नजदीक से देखा। आकाश में अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों ने फ्लाई-पास्ट कर युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन किया और हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा की गई। परेड की शुरुआत ऑपरेशन 'सिंदूर' में शहीद जवानों को मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) प्रदान करने के साथ हुई। इसी दौरान 1 पैरा स्पेशल फोर्स के शहीद लांस नायक प्रदीप कुमार की मां मंच पर सम्मान ग्रहण करते समय अचानक बेहोश हो गईं। मौके पर मौजूद सैन्य अधिकारियों ने उन्हें संभाला और त...
प्रधानमंत्री ने सेना दिवस पर भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान को किया नमन

प्रधानमंत्री ने सेना दिवस पर भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान को किया नमन

राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। प्रधानमंत्री **नरेन्द्र मोदी** ने **सेना दिवस** के अवसर पर भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना के जवान निःस्वार्थ सेवा और अटूट संकल्प का प्रतीक हैं, जो हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उनका कर्तव्यबोध पूरे देश में विश्वास और कृतज्ञता का भाव उत्पन्न करता है। उन्होंने कर्तव्य पथ पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म **एक्स** पर अलग-अलग संदेश साझा करते हुए कहा कि दुर्गम क्षेत्रों से लेकर बर्फीली चोटियों तक भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम हर देशवासी को गौरवान्वित करता है। सीमा पर तैनात जवानों का देश हृदय से अभिनंदन करता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें उन्होंने...
भारतीय सेना: युद्धभूमि में अडिग, संकट में राष्ट्र का संबल

भारतीय सेना: युद्धभूमि में अडिग, संकट में राष्ट्र का संबल

लेख
- योगेश कुमार गोयल भारतीय सेना: युद्धभूमि में अडिग, संकट में राष्ट्र का संबल प्रतिवर्ष 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष हम 78वां सेना दिवस मना रहे हैं। सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थलसेना के अदम्य साहस, जांबाज सैनिकों की वीरता, शौर्य और उनकी शहादत को याद करता है। इस विशेष अवसर पर जवानों के दस्ते और अलग-अलग रेजीमेंट की परेड के अलावा झांकियां भी निकाली जाती हैं और उन सभी बहादुर सेनानियों को सलामी दी जाती है, जिन्होंने देश और लोगों की सलामती के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। 15 जनवरी को यह दिवस मनाए जाने का विशेष कारण यह है कि 1899 में कर्नाटक के कुर्ग में जन्मे लेफ्टिनेंट जनरल केएम करियप्पा आज ही के दिन वर्ष 1949 में भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ बने थे। उन्होंने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। जनरल बुचर भारत के आखिरी ब...
इतिहास के पन्नों में 15 जनवरी : भारत–नेपाल के भीषण भूकंप की दर्दनाक याद

इतिहास के पन्नों में 15 जनवरी : भारत–नेपाल के भीषण भूकंप की दर्दनाक याद

राष्ट्रीय
बिहार, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। 15 जनवरी का दिन इतिहास के पन्नों में भारत और नेपाल के लिए एक त्रासदी के रूप में दर्ज है। वर्ष 1934 में इसी दिन आए विनाशकारी भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई थी। इस भूकंप का केंद्र भारत के बिहार क्षेत्र और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के आसपास था, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 8.4 मापी गई। भूकंप के तेज़ झटकों से शहरों और गांवों में इमारतें धराशायी हो गईं। बिहार के कई हिस्सों में सड़कें, पुल और घर पूरी तरह नष्ट हो गए, वहीं नेपाल में भी भारी जन-धन की हानि हुई। इस प्राकृतिक आपदा में अनुमानित रूप से लगभग 11 हजार लोगों की जान चली गई, जबकि असंख्य लोग घायल और बेघर हो गए। 1934 का यह भूकंप उस दौर की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है। सीमित संसाधनों और संचार व्यवस्था के अभाव के कारण राहत और बचाव कार्य भी अत्यंत कठिन रहा। इस त्रासदी ने न केवल तत्कालीन जनजीवन को...