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मातृशक्ति का समाज में योगदान, संवेदनशीलता माताओं का स्वाभाविक गुण: भैय्याजी जोशी

मातृशक्ति का समाज में योगदान, संवेदनशीलता माताओं का स्वाभाविक गुण: भैय्याजी जोशी

राष्ट्रीय
उज्जैन, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भैय्याजी जोशी ने मातृशक्ति की भूमिका को समाज की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता हर माता का स्वाभाविक गुण है। प्रकृति ने महिला को ऐसा स्वरूप दिया है, जो केवल जन्म ही नहीं देता बल्कि जीवन को संवारता भी है। भैय्याजी जोशी शनिवार को विश्वमांगल्य सभा के मालवा प्रांत के पहले अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। यह अधिवेशन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। शिप्रा तट स्थित ऐतिहासिक झालरिया मठ में आयोजित इस दो दिवसीय आवासीय अधिवेशन में मालवा प्रांत के 10 जिलों से आईं लगभग 1200 मातृशक्तियों ने सहभागिता की। भैय्याजी जोशी ने चिकित्सालयों में परिचारिका की भूमिका का उदाहरण देते हुए कहा कि यह कार्य महिलाएं अधिक कुशलता से निभाती हैं, क्योंकि प...
संस्कारित परिवार: जागरूक नागरिक, समरस समाज और संवेदनशील राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी

संस्कारित परिवार: जागरूक नागरिक, समरस समाज और संवेदनशील राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी

लेख
By: कैलाश चन्द्र संस्कारित परिवार: जागरूक नागरिक, समरस समाज और संवेदनशील राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी -कैलाश चन्द्र भारतीय समाज की रचना में परिवार केवल रक्त-संबंधों का केंद्र नहीं बल्कि एक जीवंत संस्कृति, अनुशासन और भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था है। जब दुनिया व्यक्तिगतता, उपभोक्तावाद और क्षणिक सुख की संस्कृति में उलझकर अपने मूल्यों से दूर जा रही है, तब हमारे लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि राष्ट्र-निर्माण किसी एक नीति, किसी एक नेतृत्व या किसी एक विचारधारा से नहीं चलता; उसका वास्तविक केंद्र परिवार होता है। परिवार ही वह स्थान है जहाँ भविष्य की पीढ़ियाँ अपना पहला श्वांस, पहला संस्कार, पहली दृष्टि और पहला जीवन-शिक्षण प्राप्त करती हैं। अतः परिवार में संस्कारों की स्थापना केवल निजी जीवन का विषय नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय प्रश्न है। बच्चा अपने जन्म से किशोरावस्था...