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प्रधानमंत्री ने पोंगल पर काशी-तमिल संगमम को सांस्कृतिक एकता का उदाहरण बताया

प्रधानमंत्री ने पोंगल पर काशी-तमिल संगमम को सांस्कृतिक एकता का उदाहरण बताया

राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोंगल के अवसर पर काशी-तमिल संगमम के विस्तार को देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल आज परंपराओं, भाषाओं और समुदायों को जोड़ने वाला एक सशक्त मंच बन चुकी है, जिसने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को और गहराई दी है। प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा में लिखे अपने लेख में कहा कि काशी-तमिल संगमम भारत की विविधता में निहित एकता का जीवंत उदाहरण है, जो सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी समझ और सम्मान को मजबूत कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग पोस्ट्स में कहा कि काशी-तमिल संगमम भारत की विविधता में निहित एकता का जीवंत उदाहरण है। यह पहल सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी समझ और स...
मकर संक्रांति त्योहार के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत

मकर संक्रांति त्योहार के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत

लेख
-पंकज जगन्नाथ जयस्वाल। हर साल 14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति के त्योहार का महत्व भारतीय सौर कैलेंडर के अनुसार है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति में खगोलीय घटनाओं और कृषि चक्रों से जुड़ा हुआ है। मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का संकेत देती है, जो सर्दियों के अंत और फसलों की कटाई की शुरुआत का प्रतीक है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन को विभिन्न नामों से मनाया जाता है, जैसे कि उत्तरी भारत में लोहड़ी, असम में भोगली बिहू, और दक्षिण भारत में पोंगल। इस दिन तिल और गुड़ से बने लड्डू का विशेष महत्व है, जो सर्दियों के मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी इस उत्सव को सामाजिक समरसता और छुआछूत के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाता है, और आधुनिक परिवेश में पर्यावरण की रक्षा के लिए बायोडिग्रेडेबल पतंग उड़ाने जैसी प्रथाओं को अपनाता है। मकर संक्रांति न...