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Tag: परंपरा

‘माई के बिनु छठ…’ गीत में माँ की ममता का दर्द, सुशांत अस्थाना ने छुआ दिल की धड़कन

‘माई के बिनु छठ…’ गीत में माँ की ममता का दर्द, सुशांत अस्थाना ने छुआ दिल की धड़कन

लोक रुचि
सीवान, 25 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। छठ महापर्व की चमक‑धमक, घर‑आँगन में पूजा की तैयारियाँ और घाटों पर उमड़ती आस्था के बीच जब माँ साथ नहीं होती, तो उत्सव के बीच एक खालीपन बना रहता है। इस गहरी भावनात्मक पीड़ा को भोजपुरी गायक सुशांत अस्थाना ने अपने हालिया सिंगल ‘माई के बिनु छठ…’ में शब्दों में ढाला है। सीवान जिले के निवासी अस्थाना ने इस गीत के माध्यम से माँ की ममता, छठ की परंपरा और अपनों से बिछड़ने की कसक को लोकभाषा में अभिव्यक्त किया है। गीत के शुरुआती पंक्तियों में ठेकुआ बनाने, दउरा उठाने और पूजा सामग्री जुटाने जैसे पारंपरिक दृश्यों को चित्रित किया गया है, जिससे ग्रामीण जीवन की सरलता सामने आती है। इन तैयारियों में माँ की भूमिका को याद कर गायक अपने दर्द को बयां करता है, जो उन लोगों के दिल को छूता है जो इस त्यौहार पर अपने मातृस्नेह को खो चुके हैं। गीत की सबसे प्रभावशाली शक्ति उसके बोलों ...
हमारी सांस्कृतिक कलाएं और परंपराएं जीवन में भर देती हैं उत्साह : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

हमारी सांस्कृतिक कलाएं और परंपराएं जीवन में भर देती हैं उत्साह : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राष्ट्रीय
भोपाल, 17 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विविधतापूर्ण भारतीय संस्कृति, विशेषकर दक्षिण की परम्पराएँ, सभी को रोमांचित करती हैं और हमारी सांस्कृतिक कलाएं व परंपराएं जीवन में उत्साह व उमंग का संचार करती हैं। शुक्रवार देर शाम, आंध्र प्रदेश प्रवास के दौरान विजयवाड़ा उत्सव में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री यादव ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार और टूरिज्म विभाग की ओर से गर्मजोशी भरा स्वागत मिला। कार्यक्रम का मुख्य थीम “दक्षिण का वैभव” था, जहाँ विभिन्न कलात्मक समूहों ने मनोहारी नृत्य प्रस्तुतियाँ दीं। मुख्यमंत्री ने माँ कनक दुर्गा व भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी के चरणों में नमन किया और कहा, “विजयवाड़ा उत्सव का यह द्वितीय वर्ष है, नवरात्रि का पर्व चल रहा है। माँ दुर्गा हमें सुख‑समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं और आज भगवान इंद्र भी इस...
राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की दुर्गापूजा परंपरा: जड़ों से कभी न कटती पावन भावना

राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की दुर्गापूजा परंपरा: जड़ों से कभी न कटती पावन भावना

नवाचार
सीवान, 14 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद का अपनी जन्मभूमि, अपनी मिट्टी और भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव रहा है। वे जब 1950 में भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुँचे, तब भी अपनी जड़ों और धार्मिक परंपराओं को नहीं भूले। इस लगाव का सबसे स्पष्ट प्रमाण उनकी दुर्गापूजा परंपरा है, जिसे वह हर साल जीरादेई में मनाते आएँ। डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गाँव में हुआ था। बचपन से ही वे माँ-बाप की खेती‑किसानी और गाँव के सामाजिक जीवन में गहरी रुचि रखते थे। उनके परिवार में हर वर्ष शरद ऋतु में दुर्गा माता की पूजा का विशेष आयोजन होता था, जिसमें गाँव के सभी लोग भाग लेते थे। यह परंपरा उनके दिल में गहरी जड़ें जमा गई और बाद में जब वह स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने, तब भी उन्होंने इस परम्पर...
राष्ट्रपति मुर्मु ने सीतारमण को बजट से पहले दही-चीनी खिलाई

राष्ट्रपति मुर्मु ने सीतारमण को बजट से पहले दही-चीनी खिलाई

ब्रेकिंग न्यूज़
दिल्ली, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज सुबह केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को बजट पेश करने से पहले पारंपरिक दही-चीनी खिलाकर शुभकामनाएं दीं। Это एक सांस्कृतिक परंपरा है, जो नए कार्यों की शुरुआत से पहले की जाती है।
रायपुर साहित्य उत्सव में बस्तर के 27 साहित्यकारों की भागीदारी

रायपुर साहित्य उत्सव में बस्तर के 27 साहित्यकारों की भागीदारी

छत्तीसगढ़, राज्य
जगदलपुर, 17 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को नई ऊर्जा देने तथा देशभर के साहित्यकारों, चिंतकों, कलाकारों और पाठकों को एक मंच देने के उद्देश्य से 23, 24 और 25 जनवरी को रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में बस्तर जिले के लगभग 27 साहित्यकार इस साहित्य उत्सव में भाग लेने के लिए अपना पंजियन करवाया है। जगदलपुर के वरिष्ठ साहित्यकार रुद्रनारायण पाणिग्रही ने बताया कि रायपुर साहित्य उत्सव का केंद्रीय विचार आदि से अनादि तक है, जो भारत की साहित्यिक परंपरा की निरंतरता और विकास को रेखांकित करता है। यह आयोजन अटल नगर नया रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित किया जाएगा। जहां छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और समकालीन साहित्यिक अभिव्यक्तियों का सुंदर संगम देखने को मिलेगा। यह उत्सव छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक नई पहचा...
मेदिनीपुर में ऐतिहासिक ‘तुलसी चारा’ उत्सव की धूम

मेदिनीपुर में ऐतिहासिक ‘तुलसी चारा’ उत्सव की धूम

विशेष समाचार
मेदिनीपुर, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गुरुवार तड़के को पश्चिम और पूर्व मेदिनीपुर के सबंग–पोटाशपुर इलाके में ऐतिहासिक तुलसीचारा मेले का आगाज हो गया। इस ऐतिहासिक मेले को लेकर स्थानीय लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिला। सुबह की पहली रोशनी के साथ ही तुलसी मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं, व्यापारियों और दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी। करीब 530 वर्षों से भी अधिक पुरानी परंपरा को अपने भीतर समेटे यह लोकमेला आज से शुरू होकर लगातार 10 दिनों तक चलेगा। पोटाशपुर ब्लॉक के गोकुलपुर गांव में नदी किनारे स्थित प्राचीन तुलसी मंदिर को केंद्र बनाकर हर वर्ष पौष संक्रांति के दिन इस मेले का शुभारंभ होता है। मंदिर के नाम पर ही इस मेले को तुलसीचारा मेला कहा जाता है। लगभग 12 बीघा जमीन में फैला यह मेला अविभाजित मेदिनीपुर जिले की सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक प...
मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव सुरक्षित और पारंपरिक रूप से मनाने की अपील : मुख्यमंत्री साय

मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव सुरक्षित और पारंपरिक रूप से मनाने की अपील : मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़, राज्य
रायपुर, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मकर संक्रांति के अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे पतंगों के इस उल्लासपूर्ण पर्व को सुरक्षित, जिम्मेदार और पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाएं। उन्होंने कहा कि त्योहार के आस-पास चीनी मांझा से होने वाली दुर्घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं, इसलिए इसका प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि चीनी मांझा प्रतिबंधित है और इसका उपयोग न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह आमजन, पक्षियों और राहगीरों के लिए भी एक गंभीर खतरा बनता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए। इसके अलावा, मुख्यमंत्री साय ने निर्देशित किया कि चीनी मांझा के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि नागरिकों को इसके खतरों और कानूनी प्रावधान...
योग हमारे स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने वाली सदियों पुरानी परंपरा – निर्मला भूरिया

योग हमारे स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने वाली सदियों पुरानी परंपरा – निर्मला भूरिया

मध्य प्रदेश, राज्य
झाबुआ, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। योग हमारी सदियों पुरानी परंपरा है, जिसके माध्यम से शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा सकता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने का हम सभी का दायित्व है। यह विचार मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने व्यक्त किए। वे सोमवार को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित पीएम श्री शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। निर्मला भूरिया ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का युवाओं के लिए मार्गदर्शन आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता बताई। यह दिन हमें स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को स्मरण कर उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का अवसर प्रदान ...
मकर संक्रांति पर सिद्ध बाबा धाम बनता है श्रद्धा, परंपरा और पर्यटन का संग

मकर संक्रांति पर सिद्ध बाबा धाम बनता है श्रद्धा, परंपरा और पर्यटन का संग

विशेष समाचार
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में घने जंगलों और ऊँची-नीची पहाड़ियों के बीच स्थित सिद्ध बाबा धाम अब सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, इतिहास, और विकास की जीवंत कहानी बन चुका है। मकर संक्रांति के अवसर पर यह स्थान श्रद्धालुओं से भर जाता है और पूरा क्षेत्र भक्ति और उल्लास में डूब जाता है। कुछ वर्ष पहले तक यह प्राचीन शिव मंदिर समय की चुनौतियों का सामना कर रहा था, वहीं आज यह केदारनाथ धाम की तर्ज पर बनाए गए भव्य मंदिर के रूप में श्रद्धालुओं का आकर्षण बन चुका है। रात्रि में जब यह मंदिर रोशनी से जगमगाता है, तो मानो पर्वत पर दिव्यता की छा जाती है। स्थानीय पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के नोडल अधिकारी और इतिहासकार डॉ. विनोद पांडेय के अनुसार, सिद्ध बाबा धाम की आस्था की जड़ें वर्ष 1928 से जुड़ी हुई हैं। उस समय कारीमाटी क्षेत्र मे...