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दंतेश्वरी मंदिर की दान पेटियों में मिले 19 लाख से अधिक रुपये और सोने-चांदी के आभूषण

दंतेश्वरी मंदिर की दान पेटियों में मिले 19 लाख से अधिक रुपये और सोने-चांदी के आभूषण

छत्तीसगढ़, राज्य
दंतेवाड़ा, 30 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर की 9 दान पेटियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रशासनिक अधिकारियों, मंदिर समिति के सदस्यों और कर्मचारियों की उपस्थिति में आज शुक्रवार को खोला गया। इस बार कुल 19 लाख 44 हजार 483 रुपये दान में प्राप्त हुए हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पिछली बार दान पेटियां जुलाई 2025 में खोली गई थीं। लगभग 6 महीने बाद दोबारा पेटी खोली गई है। नकद के अलावा, भक्तों ने देवी के नाम पत्र लिखकर अनेक मन्नतें मांगी हैं। इनमें से एक सरकारी नौकरी करने वाले भक्त ने पत्र में लिखा है कि उसे ऑफिस से छुट्टियां नहीं मिल रही हैं और वह परेशान है। उसने देवी मां से छुट्टी दिलाने की अर्जी लगाई है। वहीं, कुछ पत्रों में स्वास्थ्य, रोजगार, पारिवारिक सुख-शांति और परीक्षा में सफलता की कामना की गई है। इसके अलावा भक्तों द्वा...
मकर संक्रांति पर भगवान को तिल-लड्डू का भोग, परिवार की खुशहाली की कामना

मकर संक्रांति पर भगवान को तिल-लड्डू का भोग, परिवार की खुशहाली की कामना

छत्तीसगढ़, राज्य
धमतरी, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। मकर संक्रांति का पर्व पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर एक-दूसरे को तिल-गुड़ देने की परंपरा निभाई गई, जिसमें मान्यता है कि तिल-गुड़ का दान करने से जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। मकर संक्रांति के अवसर पर हर घर में आराध्य देव को तिल-गुड़ एवं तिल-लड्डू का भोग लगाया गया। पूजा-अर्चना के बाद परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की गई। इस पावन दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। घर-घर में तिल और गुड़ से बने विभिन्न पकवान तैयार किए गए, जिन्हें परिजनों और अतिथियों को परोसा गया। पर्व के अवसर पर अनेक श्रद्धालु अलसुबह महानदी पहुंचकर स्नान-ध्यान करते नजर आए। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य का क्रम चलता रहा। मालूम हो कि मकर संक्राति जिसे उत्तर भारत में लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्राति के पूर्व र...
मकर संक्रांतिः सृष्टि में ऊर्जा का नवसंचार करने वाला पर्व

मकर संक्रांतिः सृष्टि में ऊर्जा का नवसंचार करने वाला पर्व

लेख
मृत्युंजय दीक्षित मकर संक्रांति के मौके पर जब सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सृष्टि में ऊर्जा का नवसंचार करने का पर्व माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन जप, तप, दान, स्नान, श्रद्धा, तर्पण आदि विधियों का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन दिया गया दान सौ गुना बढ़कर मिलता है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि का दान किया जाता है, और गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। इस पर्व से संबंधित पौराणिक कथाएं भी हैं, जैसे भगवान भास्कर का अपने पुत्र शनिदेव से मिलने जाना और महाभारत के समय भीष्म पितामह का इसी दिन देह त्याग करना। इस दिन गंगाजी ने भगीरथ के साथ कपिल मुनि के आश्रम से सागर में जाकर मिलने का कार्य किया था। इसके अलावा, भगवान विष्णु ने इस दिन असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी, इसलिए इसे सकारात्मक...