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बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी का कट्टरपंथी एजेंडा: उदारवादी मुखौटे के पीछे छिपा सत्य

बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी का कट्टरपंथी एजेंडा: उदारवादी मुखौटे के पीछे छिपा सत्य

अंतरराष्ट्रीय
ढाका, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी की तथाकथित “मध्यमार्गी” छवि और उसकी वैचारिक जड़ों के बीच गहरा विरोधाभास स्पष्ट हुआ है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, जमात का मूल सिद्धांत जनता की संप्रभुता नहीं, बल्कि ईश्वर की सर्वोच्चता पर आधारित है, और उसका अंतिम लक्ष्य ‘इकामत-ए-दीन’ यानी इस्लाम को जीवन की पूर्ण व्यवस्था के रूप में स्थापित करना है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जमात ने “दोहरी भाषा” की राजनीति में महारत हासिल कर ली है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर, पार्टी के वरिष्ठ नेता संवैधानिक मूल्यों की बात करते हैं और तुरंत शरीयत लागू न करने का वादा करते हैं, जिससे वे खुद को एक उदार और लोकतांत्रिक संगठन के रूप में प्रस्तुत कर सकें। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह भिन्न है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां चुनावी समर्थन का निर्धारण होता है, जम...
नहीं थम रहा बंगलादेश में हिन्दुओं की हत्या का दौर

नहीं थम रहा बंगलादेश में हिन्दुओं की हत्या का दौर

लेख
-रमेश शर्मा बंगलादेश, 14 जनवरी । बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमलों और उनकी बर्बर हत्याओं का दौर रुक नहीं रहा। इसमें हिन्दू स्त्रियों के साथ सामूहिक बलात्कार का अध्याय भी जुड़ गया है। लेकिन भारत के अधिकांश राजनीतिक दल चुप हैं जिन्हें आतंकवादियों के भी मानवाधिकार की चिंता रहती है। पिछले सप्ताह काँग्रेस नेता जयराम रमेश और के वेणुगोपाल तो मीडिया से बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्या का प्रश्न सुनकर ही भाग निकले। यह वही बंगलादेश है जिसके निवासियों को कभी अपनी बांग्ला संस्कृति पर गर्व होता था और बांग्ला संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष किया था। उनके संघर्ष को सार्थक करने के लिए भारत ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी थी। 1971 का युद्ध भी झेला था। इसमें भारत के लगभग 3900 जवानों का बलिदान हुआ था और लगभग 10,000 सैनिक घायल हुए थे। लाखों करोड़ का वित्तीय भार पड़ा सो अलग। बंगलादेश यदि अस्तित्व में आया है ...