नई दिल्ली। भारत (India) की अध्यक्षता में ब्रिक्स का 18वां शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) संपन्न हो गया है। शिखर सम्मेलन से पहले ही आम सहमति बनाने की चुनौती नजर आ रही थी। हालांकि भारत की कूटनीति के बल पर नई दिल्ली घोषणापत्र (New Delhi Declaration) को सभी सदस्य देशों ने मंजूरी दे दी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (President Xi Jinping) गलवान घाटी में झड़प के बाद पहली बार भारत यात्रा पर आए थे। अब अगली बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी चीन करेगा। ऐसे में शी जिनपिंग ने पांच सूत्रीय ऐक्शन प्लान का ऐलान कर दिया है। इस पूरे ऐक्शन प्लान में व्यापार और तकनीक पर ही जोर दिया गया।
आपको बता दें कि व्यापार के मामले में चीन भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। वह अपनी सस्ती चीजें दुनियाभर के बाजार में बेचता है। ऐसे में उसने भारत के भी बड़े बाजार पर कब्जा कर रखा है।
2027 में बीजिंग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। ब्रिक्स ट्रेडिंग ब्लॉक नहीं बना है। हालांकि चीन अगर इस तरह की कोशिश करता है तो निवेश सुरक्षा नियमों और टैरिफ में कटौती के जरिए वह यही प्रयास करेगा कि वैश्विक बाजार उसका जोरदार स्वागत करे।
क्या है चीन की पांच सूत्रीय योजना
व्यापार और निवेश की सुविधाः चीन ने अपने प्लान में विशेष आर्थिक क्षेत्र पार्नटरशिप की बात कही है। इसके अलावा शी जिनपिंग ने लार्ज लैंग्वेज मॉडल के विकास और ओपन-सोर्स कम्युनिटी और जोन बनाने की बात कही है। तीसरे पॉइंट के तौर पर डिजिटल अर्थव्यवस्था का विकास, चौथा सूत्र उत्पादन को बढ़ाना और पांचवां नवोन्मेश के लिए युवाओं को अवसर प्रदान करना है। इसमें कहीं भी आतंकवाद और वैश्विक शांति का जिक्र नहीं किया गया है।
AI का मामला ज्यादा टेंशन देने वाला
चीन का विकास मॉडल पूरी दुनिया को टेंशन देना वाला है। वहीं जिनपिंग ने एआई पर जोर दिया है। चीन पहले से भी जासूसी के लिए बदनाम है। चीनी ऐप हर किसी के लिए मुसीबत बन रहे हैं। ऐसे में एआई के क्षेत्र में चीन अगर आगे निकलता है तो इससे भी दुनिया की परेशानियां बढ़ेंगी और डेटा चोरी का खतरा भी बढ़ेगा।
चीन के निवेश पर भारत की कड़ी नजर रहती है। कई पड़ोसी देशों को चीन ने कर्जजाल में फंसा रखा है। बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान में इनमें से ही हैं। श्रीलंका जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर चीन ने अच्छा खासा कब्जा कर लिया है। ऐसे में जापान और यूरोप और अमेरिका तक चाहते हैं कि उनकी निर्भरता चीन पर कम हो जाए। इसको लेकर ही भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। आरसीईपी से निकलने के बाद भी भारत को चीन का डर सता रहा था।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन अपने संबोधन में जिनपिंग ने कहा कि चीन इस योजना का इस्तेमाल खुलेपन का विस्तार करने, ‘वैश्विक विकास पहल’ को लागू करने और ‘बेल्ट एंड रोड’ सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए करेगा। उन्होंने कहा कि यह पंचवर्षीय रूपरेखा चीन की आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति का केंद्र है, जिसके जरिए चीन सतत विकास हासिल करने, तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख इंजन के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
जिनपिंग ने कहा, “इस वर्ष चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत हो रही है।” उनका यह बयान यह इशारा करता है कि चीन अपने नए योजना चक्र को न केवल अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को नया आकार देने के मौके की तरह देखता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को गहरा करने के तरीके में भी देखता है। वर्ष 2026 के संसदीय सत्रों के दौरान मंजूर हुयी यह योजना 2030 तक देश के विकास की प्राथमिकताओं को तय करती है और 2035 तक दीर्घकालिक लक्ष्यों का हिस्सा है।
जिनपिंग ने कहा कि अधिक आत्मनिर्भरता का अर्थ वैश्विक अलगाव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी नेटवर्क के साथ गहराई से जुड़ा रहेगा। ब्रिक्स सदस्यों और ‘वैश्विक दक्षिण ‘ के लिए इसका आशय चीनी बाजार तक अधिक पहुंच, विदेश में बढ़ते चीनी निवेश और एआई, हरित ऊर्जा व बुनियादी ढांचे में व्यापक सहयोग के अवसर हो सकते हैं।
