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ग्वालियर में सुरक्षा अलर्ट: एयरबेस के पास 12 साल से रह रहे 8 बांग्लादेशी गिरफ्तार, हरियाणा इनपुट पर कार्रवाई

ग्वालियर, 11 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बड़ा सुरक्षा मामला सामने आया है। महाराजपुरा थाना क्षेत्र से पुलिस ने आठ बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 12 साल से बिना नागरिकता दस्तावेजों के एयरबेस के पास रह रहे थे। यह कार्रवाई हरियाणा पुलिस के इनपुट के आधार पर की गई, जिसके बाद स्थानीय और राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।

ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी धर्मवीर सिंह) ने बताया कि ये सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं और फिलहाल पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त पूछताछ में हैं।

“इन सभी के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं। कई संदिग्ध नंबर और कॉल डिटेल्स मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है,” एसएसपी ने कहा।


एयरबेस के पास रह रहे थे बांग्लादेशी

ग्वालियर के जिस इलाके से इन्हें पकड़ा गया है, वहां भारतीय वायुसेना का महाराजपुरा एयरबेस, बीएसएफ, सीआरपीएफ और सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। ऐसे में बिना नागरिकता दस्तावेजों के यहां रहना गंभीर सुरक्षा खतरा माना जा रहा है।

इन बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान इस प्रकार हुई —

  • मोहम्मद शरीफ (40) पुत्र मोहम्मद
  • सीलिमा (25) पत्नी मोहम्मद शरीफ
  • रफीक (14) पुत्र मोहम्मद शरीफ
  • चुमकी पुत्री मोहम्मद शरीफ
  • अदोरी (8)
  • आशिक (15) — मोहम्मद शरीफ का भांजा
  • रातुल शेख (23) पुत्र शादाक
  • उजा (2) पुत्र रातुल

पुलिस जांच में सामने आया कि ये सभी बांग्लादेश के जेस्सोर शहर के निवासी हैं। मोहम्मद शरीफ का पिता नूर सबसे पहले भारत आया था और यहीं बस गया था। बाद में पूरा परिवार ग्वालियर में आकर बस गया।


हरियाणा में पकड़े गए रिश्तेदारों से खुलासा

ग्वालियर में कार्रवाई हरियाणा के पानीपत से मिले इनपुट के आधार पर हुई, जहां करीब एक हफ्ते पहले इनके रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया गया था। उनकी पूछताछ में ग्वालियर में छिपे इस परिवार की जानकारी सामने आई। इसके बाद हरियाणा पुलिस की एक टीम ग्वालियर पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया।


मजदूरी और कचरा प्रबंधन के ठेके में कर रहे थे काम

पुलिस के अनुसार, पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक महाराजपुरा इलाके में कचरा इकठ्ठा करने और नष्ट करने का काम करते थे। यह काम उन्हें देवेंद्र कंसाना, जो दीनदयाल नगर में ठेकेदारी करते हैं, द्वारा दिया गया था। इसके बदले उन्हें हर महीने ₹15,000 वेतन मिलता था।

रातुल शेख (23) ने पूछताछ में बताया कि वह पांच साल पहले भारत आया था और 4,000 रुपये देकर अवैध रूप से सीमा पार की थी। इसके बाद वह ग्वालियर में बस गया।
दो बच्चों — अदोरी (8) और उजा (2) — का जन्म ग्वालियर में ही हुआ है।


किरायेदारों का वेरिफिकेशन अब अनिवार्य

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परिवार लंबे समय से इलाके में किराए पर रह रहा था और कभी भी पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ।
शहरवासियों ने चिंता जताई कि ग्वालियर में हजारों किरायेदार बिना पहचान सत्यापन के रह रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है।

पुलिस ने इस घटना के बाद शहर के आउटर इलाकों में वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू करने का निर्णय लिया है। अब हर किरायेदार और बाहरी व्यक्ति की पहचान, दस्तावेज और पृष्ठभूमि की जांच अनिवार्य की जाएगी।


सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

महाराजपुरा की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए एयर इंटेलिजेंस, NIA, और IB की टीमें भी जांच में जुट गई हैं। सभी संदिग्ध मोबाइल नंबर और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है।

एसएसपी धर्मवीर सिंह ने कहा —
“यह मामला अत्यंत संवेदनशील है। जांच के बाद सभी आरोपियों को बांग्लादेश डिपोर्ट किया जाएगा।”


मुख्य बिंदु:

  • ग्वालियर के महाराजपुरा में 8 बांग्लादेशी गिरफ्तार
  • 12 साल से एयरबेस के पास रह रहे थे
  • हरियाणा पुलिस के इनपुट पर संयुक्त कार्रवाई
  • संदिग्ध नंबरों और संपर्कों की जांच शुरू
  • सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, शहर में वेरिफिकेशन अभियान शुरू

ग्वालियर में यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरे को उजागर करती है — और यह सवाल भी उठाती है कि आखिर इतने वर्षों तक संवेदनशील क्षेत्र में बिना पहचान दस्तावेजों के विदेशी नागरिक कैसे रह रहे थे।

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