सागर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) के डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय (Dr. Harisingh Gour Central University) में शोध छात्राओं से उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यंहा भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष (एचओडी) पर गंभीर आरोप लगाए गए है, पूरे मामले में छात्र संगठन इकाई एबीवीपी ने जमकर हंगामा कर एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद भारद्वाज को एचओडी के पद से हटाए जाने की मांग की गई है।
बताया जा रहा है कि दर्जन भर से ज्यादा छात्राओं ने एचओडी पर आरोप लगाए हैं कि वे वाट्सएप पर मैसेज कर छात्राओं को डिनर पर चलने के लिए दबाव बनाते थे ओर छात्राओं से अश्लील बातें किया करते थे। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह एक अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था है ताकि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके।
एचओडी पद से हटाया गया
सागर जिले के डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोध छात्राओं सामान्य एवं व्यावहारिक भूगोल विभाग में महिला शोधार्थियों के उत्पीड़न और दबाव के साथ पत्रों में हेरफेर का गंभीर मामला सामने आया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से एचओडी के प्रशासनिक दायित्व से मुक्त कर दिया है। आंतरिक शिकायत समिति की जांच जारी रहने तक एचओडी का कार्यभार व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता संभालेंगे। आरोप है कि प्रो. विनोद भारद्वाज महिला शोधार्थियों का उत्पीड़न कर रहे थे। वे एक शोधार्थी को वाट्सएप पर मैसेज कर डिनर पर चलने के लिए दबाव बनाते थे। हाल ही में व्हिसल ब्लोअर अरविंद भट्ट ने भी एक लिखित शिकायत कर एचओडी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी।
महिला शोधार्थियों ने लगाए आरोप फिर खुली पोल
मिली जानकारी के अनुसार मामले की शुरुआत इसी माह जुलाई में हुई जब भूगोल विभाग की एक महिला शोधार्थियों ने एचओडी प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज पर मानसिक उत्पीड़न, अमर्यादित व्यवहार, चाय-नाश्ते के लिए बुलाना और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत सौंपी। इसके जवाब में, 20 जुलाई 2026 को एचओडी की ओर से भी शोधार्थियों के खिलाफ अनुशासनहीनता, अनुपस्थिति और फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने जैसे आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई।
उच्च स्तरीय जांच समिति गठित
विज्ञान अध्ययन शाला के प्रो. देवाशीष बोस ने 24 जुलाई 2026 को कुलपति को लिखे पत्र में पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध और भयभीत करने वाला बताते हुए निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की अनुशंसा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शोधार्थियों की सुरक्षा और विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखना सर्वोपरि है। इसके बाद डीन की अनुशंसा और आईसीसी की चल रही जांच के आधार पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव ने 29 जुलाई 2026 को कार्यालय से आदेश जारी कर प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को एचओडी पद से हटा दिया।
करियर बर्बाद करने की धमकी
इस मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 23 ओर 24 जुलाई को शोधार्थियों द्वारा शिकायत वापस लेने का एक पत्र हासिल हुआ। हालांकि, 24 जुलाई 2026 को छह शोधार्थियों ने अधिष्ठाता प्रो. देवाशीष बोस को लिखित पत्र सौंपकर खुलासा किया कि उनसे बंद कमरे में डरा-धमकाकर और बिना विषय-वस्तु पढ़ाए सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। शोधार्थियों ने आरोप लगाया कि दो सहायक प्राध्यापकों डॉ. शिवानी मीना एवं डॉ. दीपिका वशिष्ठ ने उन्हें पुलिस शिकायत, मानहानि केस और करियर बर्बाद करने की धमकी देकर जबरन हस्ताक्षर लिए। वहीं शिकायत वापसी के इस पत्र में उस शोधार्थी के भी हस्ताक्षर थे। जिसने शिकायत ही नहीं की थी।
