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PoK में कई हफ्तों से प्रदर्शन जारी.. जनरल डायर की तरह फायरिंग कर रहा PAK…. स्थिति तनावपूर्ण

इस्लामाबाद। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। आठ हफ्तों से जारी आंदोलन के दौरान रावलाकोट और मीरपुर (Rawalakot and Mirpur) में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी करने का आरोप लगाया है। अधिकारों, शांति और क्षेत्रीय संसाधनों पर अधिकार की मांग को लेकर जारी यह विरोध प्रदर्शन 50 से अधिक दिनों से चल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले तीन दिनों में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती और कई क्षेत्रों में हुई झड़पों के बाद हालात चिंताजनक रूप से बिगड़े हैं।


प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद रावलाकोट में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर फिर से गोलीबारी की गई, जिसमें हताहतों की संख्या प्रशासनिक आंकड़ों से कहीं अधिक है। वहीं, मीरपुर में प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई है।


परिजनों का लाश भी नसीब नहीं
प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा मृतकों के शवों को उनके परिजनों को सौंपने से रोका जा रहा है। रिश्तेदारों की सहमति के बिना ही शवों को दफनाया जा रहा है। आरोप है कि कुछ शवों को बेहद अपमानजनक तरीके से घसीटकर वाहनों में लादा गया।


मीडिया ब्लैकआउट
आंदोलनकारियों ने पाकिस्तानी मीडिया पर हिंसा के वास्तविक आंकड़ों को छिपाने और आंदोलन की गलत तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर जारी वीडियो और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के बयान यह दर्शाते हैं कि स्थिति सरकारी दावों से कहीं अधिक भयावह है। इसके अलावा, सुरक्षाकर्मियों काले कपड़ों में आए संदिग्ध लोगों पर दुकानों में लूटपाट, राशन की चोरी और घरों में तोड़फोड़ करने के आरोप भी लगे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।


दमन के बावजूद बढ़ रहा जनसमर्थन
सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। आयोजकों का दावा है कि बुधवार को 500 से अधिक नए लोग इस धरने में शामिल हुए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक अधिकारों, सुशासन और स्थानीय संसाधनों पर मालिकाना हक से जुड़ी उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं यह आंदोलन जारी रहेगा।

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