पटना। जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिली है। पुलिस पर हमले और हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई पूरी हो गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में 1 अगस्त को आदेश सुनाया जाएगा।
बेऊर जेल से पेश हुए तेजप्रताप
अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी आरती उपाध्याय की अदालत में बेऊर केंद्रीय कारागार में बंद तेजप्रताप यादव और छात्र अभय आत्मन सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे।
पुलिस का दावा- प्रदर्शन के दौरान हुआ हमला
गांधी मैदान थाना पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया, जिसमें थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने इस मामले में तेजप्रताप यादव और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
बचाव पक्ष ने बताया राजनीतिक मामला
तेजप्रताप यादव की ओर से अदालत में पेश अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक कारणों से झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने अदालत से नियमित जमानत देने की मांग करते हुए कहा कि तेजप्रताप निर्दोष हैं। वहीं सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया।
अन्य आरोपियों की याचिकाओं पर भी सुनवाई
पटना सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार उपाध्याय ने इस मामले में विधायक संदीप सौरभ सहित करीब एक दर्जन नेताओं और छात्रों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई की। अदालत ने पुलिस से आरोपियों के आपराधिक इतिहास और घायल पुलिसकर्मियों की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है। इन याचिकाओं पर भी अगली सुनवाई 1 अगस्त को होगी।
प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ था मामला
यह मामला उस प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई और पुलिस पर हमला किया गया। इसी आधार पर गांधी मैदान थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
बिहार बंद के समर्थन का भी आरोप
पुलिस के अनुसार, तेजप्रताप यादव को वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा 25 जुलाई को बुलाए गए बिहार बंद के समर्थन और उससे जुड़े प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान पटना समेत सारण, सिवान, औरंगाबाद और भागलपुर में कई स्थानों पर हिंसक घटनाएं सामने आई थीं।
गिरफ्तारी के समय पर भी उठाए सवाल
बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी दलील दी कि तेजप्रताप यादव को प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। अधिवक्ता के अनुसार, एफआईआर देर रात दर्ज की गई, जबकि गिरफ्तारी उससे कई घंटे पहले हो चुकी थी। इस बिंदु को भी जमानत सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष रखा गया।
तेजप्रताप यादव को फिलहाल नहीं मिली राहत, जमानत पर फैसला 1 अगस्त को; अदालत ने आदेश रखा सुरक्षित
पटना। जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिली है। पुलिस पर हमले और हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई पूरी हो गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में 1 अगस्त को आदेश सुनाया जाएगा।
बेऊर जेल से पेश हुए तेजप्रताप
अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी आरती उपाध्याय की अदालत में बेऊर केंद्रीय कारागार में बंद तेजप्रताप यादव और छात्र अभय आत्मन सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे।
पुलिस का दावा- प्रदर्शन के दौरान हुआ हमला
गांधी मैदान थाना पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया, जिसमें थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने इस मामले में तेजप्रताप यादव और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
बचाव पक्ष ने बताया राजनीतिक मामला
तेजप्रताप यादव की ओर से अदालत में पेश अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक कारणों से झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने अदालत से नियमित जमानत देने की मांग करते हुए कहा कि तेजप्रताप निर्दोष हैं। वहीं सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया।
अन्य आरोपियों की याचिकाओं पर भी सुनवाई
पटना सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार उपाध्याय ने इस मामले में विधायक संदीप सौरभ सहित करीब एक दर्जन नेताओं और छात्रों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई की। अदालत ने पुलिस से आरोपियों के आपराधिक इतिहास और घायल पुलिसकर्मियों की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है। इन याचिकाओं पर भी अगली सुनवाई 1 अगस्त को होगी।
प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ था मामला
यह मामला उस प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई और पुलिस पर हमला किया गया। इसी आधार पर गांधी मैदान थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
बिहार बंद के समर्थन का भी आरोप
पुलिस के अनुसार, तेजप्रताप यादव को वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा 25 जुलाई को बुलाए गए बिहार बंद के समर्थन और उससे जुड़े प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान पटना समेत सारण, सिवान, औरंगाबाद और भागलपुर में कई स्थानों पर हिंसक घटनाएं सामने आई थीं।
गिरफ्तारी के समय पर भी उठाए सवाल
बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी दलील दी कि तेजप्रताप यादव को प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। अधिवक्ता के अनुसार, एफआईआर देर रात दर्ज की गई, जबकि गिरफ्तारी उससे कई घंटे पहले हो चुकी थी। इस बिंदु को भी जमानत सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष रखा गया।
