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यूरोप और अमेरिका जाने वाले भारतीय ध्यान दें! फोन में यह सॉफ्टवेयर हुआ तो सीधे पहुंचेंगे सलाखों के पीछे


नई दिल्‍ली। सोचिए, अगर एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी अधिकारी आपसे फोन का पासवर्ड मांगे और आप अपने फोन का डेटा सुरक्षित रखने के लिए उसे वाइप (डिलीट) कर दें, तो क्या होगा? शायद आप सोचें कि डेटा आपकी प्रॉपर्टी है, लेकिन अमेरिकी सरकार के लिए यह एक बहुत बड़ा अपराध बन चुका है. अटलांटा एयरपोर्ट पर एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां GrapheneOS नाम का प्राइवेट ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अपनी प्राइवेसी की रक्षा करना कोई गुनाह है? आइए जानते हैं इस विवादित केस और इस खास एंड्रॉयड OS की पूरी कहानी.
क्या है अटलांटा एयरपोर्ट का यह पूरा मामला?
टलांटा के हार्ट्सफील्ड-जैकसन एयरपोर्ट पर सैम्युअल्स ट्यूनिक नाम का एक अमेरिकी नागरिक डोमिनिकन रिपब्लिक से लौटा था. बॉर्डर सिक्योरिटी अधिकारियों ने उसे रोककर उसका फोन अनलॉक करने को कहा. जब ट्यूनिक ने पासवर्ड दर्ज किया, तो स्क्रीन कुछ बार ब्लिंक हुई और फोन रिस्टार्ट हो गया. इसके साथ ही फोन के अंदर का सारा डेटा हमेशा के लिए डिलीट हो गया. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) का आरोप है कि उसने सबूत मिटाने के लिए जानबूझकर डेटा डिलीट किया है, जो कि एक संघीय अपराध (Federal Crime) है.
‘ग्राफीन OS’ (GrapheneOS) क्या है और यह कैसे काम करता है?

सैम्युअल्स ट्यूनिक का फोन आम एंड्रॉयड पर नहीं, बल्कि ‘GrapheneOS’ पर चल रहा था. यह एक खास किस्म का कस्टम ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसे गूगल पिक्सल (Google Pixel) स्मार्टफोन्स के लिए बनाया गया है. यह OS यूजर्स को जबरदस्त प्राइवेसी देता है. इसमें एक ‘डुरेस पासकोड’ (Duress Passcode) फीचर होता है. अगर आप असली पासवर्ड के बजाय यह खास पासकोड डालते हैं, तो फोन को लगता है कि आप मुसीबत में हैं और वह तुरंत अपना सारा डेटा परमानेंटली डिलीट कर देता है.
यूरोप में भी इस सॉफ्टवेयर को लेकर है खौफ

केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप के कई देशों में भी इस सॉफ्टवेयर को शक की निगाह से देखा जा रहा है. स्पेन के कैटेलोनिया में पुलिस उन लोगों को अलग से प्रोफाइल और टारगेट कर रही है, जो गूगल पिक्सल फोन में GrapheneOS का इस्तेमाल करते हैं. पुलिस मानकर चल रही है कि इस प्राइवेसी-फ्रेंडली OS का इस्तेमाल केवल ड्रग्‍स तस्‍कर या आपराधिक गैंग के लोग ही करते हैं.
GrapheneOS की सफाई: “हम पूरी तरह लीगल हैं”

इस विवाद के बाद GrapheneOS बनाने वाली टीम ने बयान जारी किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका ऑपरेटिंग सिस्टम 100% कानूनी है और अमेरिकी संविधान के तहत सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि उनकी सिक्योरिटी का मकसद यूजर्स को डेटा चोरी और गैर-कानूनी जासूसी से बचाना है, न कि किसी अपराध को छुपाना. उनके मुताबिक, यह ऑपरेटिंग सिस्टम ऑटोमैटिक रीबूट और स्ट्रॉन्ग एन्क्रिप्शन के जरिए यूजर के डेटा को सेफ रखता है.
साइबर एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस और जांच एजेंसियों का यह रुख खतरनाक साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर प्राइवेसी टूल का इस्तेमाल करने वालों को बाय-डिफ़ॉल्ट क्रिमिनल माना जाने लगेगा, तो आम नागरिकों की प्राइवेसी खतरे में पड़ जाएगी.
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100 साल पुराने घर में

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