लखनऊ । श्रीराम मंदिर (Shri Ram Temple) के चंदा गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज न कराना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया है। गबन के साक्ष्य मिल चुके हैं, बड़ी रकम भी बरामद हुई और संदिग्ध भी पकड़े गए, उसके भी रिपोर्ट न करना गंभीर सवाल खड़े करता है। सीधेतौर पर अब ट्रस्ट के बड़े जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है।
अब एसआईटी आगे, सब पीछे
मामले में भले ही एसआईटी (SIT) गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी।
ये किसी ट्रस्ट का काम नहीं
जिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी हुई है तो पहले एफआईआर करवानी चाहिए। फिर पुलिस या अन्य जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी आदि की कार्रवाई करती।
एसआईटी जुटाएगी ब्योरा, संदिग्धों से पूछताछ भी करेगी
राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
वहीं, मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। ट्रस्ट की ओर से की गई अब तक की जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाएगी।
इस बीच एक सप्ताह पहले उजागर हुए इस मामले में गबन के साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला बीते सप्ताह उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी तब से खुद ही गोपनीय जांच में जुटे हैं। ट्रस्ट के ऑफिस के पास किसी भी बाहरी शख्स के जाने पर रोक है।
इन सबके बीच शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं।
चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता या प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलने पर उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।
चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा चिकित्सकीय जांच के लिए केरल गए
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।
सूत्रों के अनुसार चंपत राय को जुकाम के साथ शुगर बढ़ने की शिकायत है, जिसके चलते वह स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। अनिल मिश्रा आंखों की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।
