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ईरान-इजरायल युद्ध से प्रभावित होगा दुनियाभर का कारोबार…. नोएडा के व्यापारियों पर पड़ेगा असर

ग्रेटर नोएडा। ईरान-इजरायल युद्ध (Iran–Israel War) के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार (International market) में कारोबार प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है। इतना ही नहीं, डालर के मुकाबले रुपये के 92.50 के रिकार्ड निचले स्तर की ओर फिसलने की आहट ने नोएडा के व्यापारिक, कारोबारी गलियारों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। एक प्रमुख औद्योगिक हब होने के नाते, डालर की मजबूती और तेल की किल्लत का सीधा असर यहां के आम नागरिक से लेकर बड़े कारोबारियों तक पड़ने वाला है।


लाॅजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन पर मार
नोएडा और ग्रेटर नोएडा देश के सबसे बड़े लाॅजिस्टिक्स हब में से एक बनते जा रहे हैं। तेल की कीमतें बढ़ने से ट्रकों का भाड़ा 15-20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे दादरी और जेवर के आसपास चल रहे विकास कार्यों की लागत बढ़ेगी और फैक्ट़ी में कच्चा माल लेकर आने का किराया भी महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर कारोबार पर दिखाई देगा।


एमएसएमई और निर्यातकों की बढ़ी चिंता
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-इकोटेक एक, दो, तीन, उद्योग विहार, यूपीसीडा की साइट चार,पांच, बी, सी समेत नोएडा के फेज दो, सेक्टर एक, दो, तीन, चार, पांच, से लेकर 63,67 तक करीब 15 से अधिक सेक्टरों में क्रियाशील एमएसएमई उद्योग पर भी इसका सीधा असर दिखने को मिलेगा।


इन इकाईयों में आने वाला कच्चा माल महंगा हो जाएगा। रुपया कमजोर होने से कच्चा माल महंगा होगा। निर्यातकों का कहना है कि हालांकि डालर मजबूत होने से उन्हें फायदा दिखता है, लेकिन कच्चे माल की बढ़ती लागत और शिपिंग कंटेनरों के भारी किराया उनके लाभ को पूरी तरह से खत्म कर देगा। – शुभम किरोड़ीमल अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर आफ एक्सपोर्टर्स।


मध्यम वर्ग की जेब पर दोहरी मार
गौतमबुद्ध नगर में कार्यरत लाखों प्रोफेशनल और व्यापारी, कारोबारी जो निजी वाहनों से दिल्ली, गाजियाबाद,गुरुग्राम, मेरठ, आगरा जाते हैं, उनके लिए पेट्रोल-डीजल का खर्च बजट बिगाड़ देगा। साथ ही, डालर महंगा होने से इलेक्ट्रानिक्स (मोबाइल, लैपटाप) की कीमतें भी बढ़ने की आशंका है, जिसका नोएडा एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र है। – जेड रहमान, चेयरमैन टेक्निकल आईआईए।


डालर और रुपये की स्थिति
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनातनी का सीधा असर डालर और रुपए पर भी दिखने लगा है। इसी कारण पिछले एक सप्ताह में रुपए करीब 0.57 टूट कर 91.52 रुपए के स्तर पर पहुंच गया है। एक सप्ताह पूर्व 25 जनवरी डालर के मुकाबले रुपए 90.95 रुपये पर ट्रेंड कर रहा था, जो सोमवार शाम पौने चार बजे तक 91.52 रुपये तक पहुंच गया। युद्ध जल्द खत्म नहीं होता इसके 92.50 रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इस स्थिति को बाजार भी असंतुलित होने का खतरा है। – राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आईआईए।

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