
रायगढ़, 03 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। जब कोई अपना अचानक बिछुड़ जाए, तब वह पीड़ा परिवार को भीतर तक झकझोर देती है। ऐसी ही पीड़ा से गुजर रहे अनेक परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से रायगढ़ पुलिस द्वारा “ऑपरेशन मुस्कान” के तहत उल्लेखनीय कार्य किया गया है। पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में इन अभियानों के माध्यम से गुमशुदा बच्चों और व्यक्तियों की खोज कर उन्हें उनके परिजनों से मिलाया गया है, जिससे कई चेहरों पर वर्षों बाद मुस्कान लौट आई है।
रायगढ़ पुलिस ने आज मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि जनवरी माह में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से कुल 59 गुम इंसान दर्ज किए गए थे। पुलिस की सतत जांच और प्रयासों से माह जनवरी में 56 गुम लोगों को ढूंढ निकालकर परिजनों से मिलाया जा चुका है। नाबालिगों की बात करें तो जनवरी में 16 नाबालिग गुम दर्ज हुए, जिनमें से 14 गुम इंसान को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सकुशल बरामद किया है। जांच के दौरान जिन मामलों में नाबालिगों को बहला-फुसलाकर भगाने की पुष्टि हुई, वहां आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की गई। बीते दो दिनों में चक्रधरनगर, धरमजयगढ़, पुसौर और कोतरारोड़ पुलिस ने गुम नाबालिगों को उनके परिजनों से मिलाया है। इनमें सबसे उल्लेखनीय मामला कोतरारोड़ का रहा, जहां करीब 8 साल से लापता बालक को पुलिस टीम ने सतारा (महाराष्ट्र) से दस्तयाब कर परिजनों को सौंपा, जिससे परिवार में फिर से खुशियां लौट आईं।
पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि जिले में ऑपरेशन मुस्कान निरंतर प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। गुम नाबालिगों एवं गुम इंसानों की तलाश को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों से मित्रवत व्यवहार रखें, उनकी गतिविधियों पर ध्यान दें तथा सोशल मीडिया संपर्कों की नियमित निगरानी करें।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों से जुड़े अपराधों में कठोर दंड का प्रावधान है। बच्चों को बहला-फुसलाकर भगाने या उनके साथ किसी भी प्रकार का अनुचित कृत्य करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे आरोपियों को त्वरित गिरफ्तारी कर सीधे जेल भेजा जाएगा।
